रेगिस्तान में ,मरू महोत्सव का समापन

रेत के महासागर में सोमवार की शाम लोक संस्कृति के रंगों का सागर उफान मार रहा था…। देश विदेश से आए सैलानी लोक कलाकारों की हर एक प्रस्तुति पर मंत्रमुग्ध हो रहे थे..। डेजर्ट फेस्टिवल के समापन पर हर कोई यह चाह रहा था कि काश यह उत्सव कुछ दिन और चलता।
कभी राजस्थानी रंग तो कभी धार्मिकता से ओतप्रोत प्रस्तुति भाव विभोर कर रही थी। शानदार रोशनी में भीगे धोरों पर सजी इस मनोहारी सांस्कृतिक सांझ का आनंद उठाने के लिए बड़ी संख्या में देशी-विदेशी सैलानी और शहरवासी उपस्थित थे। ख्यातनाम कलाकारों ने सबका मन मोह लिया।
जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर रेते के धोरों की धरती सम के मखमली व लहरदार धोरे हर किसी को इतनी भा गए कि इन्हें बरसों तक नहीं भुलाया जाएगा। पूरे सम क्षेत्र में लोकप्रिय धोरों पर जन सैलाब उमड़ पड़ा। शाम चार बजे तक जैसलमेर से सम तक पूरे रास्ते वाहनों की कतार लगी रही।
दोपहर बाद सम की ओर पहुंचने का दौर निरंतर जारी रहा। तीन दिवसीय मरू महोत्सव के अंतिम कार्यक्रम के रूप में सम के धोरों पर सोमवार की सांझ हुए आकर्षित कार्यक्रमों ने चारों ओर लोक मंगल का जबरदस्त उत्साह व उल्लास बिखेरा।

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