भगोरिया उत्सव की शुरुआत 20 मार्च से

आम के मोर की मदराई गंध से सराबोर, पपीहे के कलरव से अनुगूंजित और टेसू की रक्तिमा से लेकर अमलतास की स्वर्णिमता से पगा आदिम उल्लास के पर्व भगोरिया की शुरुआत 20 मार्च से हो गई। पहले दिन जिले में कल्याणपुरा, रोटला, ढेकल बड़ी, मदरानी, माछलिया, करवड़ व उमरकोट में हाट भराए, जहां सुबह से शाम तक ढोल-मांदल की थाप और थाली की खनक पर आदिवासियों की कुर्राटी गूंजती रही। इस दौरान अंचल में आदिवासियों की अल्हड़ता और सांस्कृतिक विरासत की विपुलता का सम्मिलित समारोह हर कहीं नजर आने लगा है। युवक-युवतियों ने हाथों पर पारंपरिक टैटू गुदवाए और पान और आईस्क्रीम का लुत्फ लिया। झाबुआ-आलीराजपुर जिले में कुल 60 स्थानों पर मेले लगेंगे। जहां ढोल की पुरकशिश गूंज और मांदल की हुलस के साथ थाली की खनक पर लयबद्ध थिरकन करते आदिवासी युवाओं की टोलियां उत्सव का उत्साह प्रकट करती नजर आएगी। भगोरिया की शुरुआत के साथ ही लोक संस्कृति अपने पूर्ण रूप में गुलजार हो गई। पैंट शर्ट पहने और काला चश्मा चढ़ाए युवा और साड़ी पहनी महिलाओं ने जबर्दस्त नृत्य किया। कुल मिलाकर भगोरिया हाट आदिम संस्कृति के साथ आधुनिकता के संगम के नाम रहा।

    'No new videos.'

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *