माल्वा उत्सव

मालवा उत्सव में गुरुवार को मखमली शाम में वाद्ययंत्रों के सुर-ताल ने ऐसा समां की दिल बाग-बाग हो उठा। एक मंच पर देशभर के नृत्य की संस्कृति का जो संगम दिखा, उसने दर्शकों का आना सार्थक कर दिया। ढोलक की थाप दिल धड़क उठे।
इससे पहले लालबाग परिसर में हजारों दर्शकों ने खरीदी के साथ विभिन्न प्रांतों के व्यंजनों का लुत्फ भी लिया। बड़े गुजरात की आइस डिश, दाबेली पाव, मालवी दाल-बाफले, राजस्थानी चूरमा, सिंधी दाल पकवान, खस्ता चाट, केरल नारियल पानी, पानी और दही पूरी बंगाली दही, पूरण पोली कढ़ी का स्वाद लेते रहे। बच्चों ने ऊंट की सवारी की। शाम ढलते ही नियोन लाइट्स से पूरा परिसर जगमगा उठा और देशभर के नृत्य दलों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

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