तकनीकि दुनिया में डिजिटल समाज

जर्मन ब्लॉगर साशा लोबो सम्मेलन में काफी मशहूर हैं। उन्हें लगता है कि वे लोगों की आलोचना का शिकार बने हैं। लोगों ने उनके ब्लॉग पर काफी बुरा भला कहा और इसे शिटस्टॉर्म का नाम दिया गया है। लोबो कहते हैं कि कुछ शिटस्टॉर्म काफी बुरे थे और कुछ सामान्य थे।

लोबो ने जनता को ट्रोल्स के बारे में भी बताया। ट्रोल इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले ऐसे लोग होते हैं जो अपने फेसबुक या ब्लॉग कमेंट के जरिए लेखक या किसी और को ठेस पहुंचाते हैं।

लेकिन रिपुब्लिका इंटरनेट नर्ड्स यानी इंटरनेट विदों के लिए ही नहीं है। डीडब्ल्यू से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह अभिव्यक्ति की आजादी की बात है और इसके जरिए हम पूछ सकते हैं कि हम अपने लिए किस तरह का डिजिटल समाज चाहते हैं।

इसके लिए आम लोगों और राजनीतिज्ञों में भी जागरूकता लानी होगी क्योंकि नेता अब जाकर इंटरनेट को समझ रहे हैं। आजकल ट्विटर के जरिए सरकार की नीतियों का भी पता लगता है। जर्मन सरकार के प्रवक्ता श्टेफन जाइबर्ट ट्विटर पर हैं और लगातार खबरें देते रहते हैं। अमेरिका में भारत की राजदूत निरुपमा राव लगातार ट्वीट करती रहती हैं। भारत के कई नेता भी ट्विटर में अपनी सोच सार्वजनिक करते रहते हैं। प्रधानमंत्री दफ्तर का भी अपना ट्विटर अकाउंट है।

इस साल रिपुब्लिका में 5,000 लोग आ रहे हैं। 350 कार्यकर्ता अपने प्रोजेक्ट और अपने ख्याल पेश करेंगे। अमेरिकी कार्यकर्ता जिलियन यॉर्क और क्यूबा की ब्लॉगर यओआनी सांचेस भी पहुंच रही हैं। सांचेस ने 2008 में अपने ब्लॉग के लिए डीडब्ल्यू बॉब्स का ईनाम जीता लेकिन वहां की सरकार ने उन्हें देश से बाहर नहीं जाने दिया। अब वह आखिरकार पुरस्कार लेने जर्मनी आ चुकी हैं।

    'No new videos.'

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