उच्च शिक्षा में सुधार की जरूरत-राष्ट्रपति श्री मुखर्जी

राष्ट्रपति श्री मुखर्जी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में और सुधार की जरूरत बताते हुए कहा कि विश्व के पहले 200 स्थानों पर आने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एक भी भारतीय शिक्षण संस्थान शामिल नहीं है। जबकि तेरहवीं शताब्दी में तक्षशिला और नालंदा जैसे भारतीय विश्वविद्यालय भारतीय, यूनानी, फारसी और चीन की संस्कृति और ज्ञान के संगम थे। उन्होंने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को और बेहतर बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का बेहतर ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी, चिकित्सा शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा मुहैया कराने के लिए भी प्रयास करना चाहिए।

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने विश्वस्तर की रेटिंग में 200 उच्च शिक्षा संस्थानों में भारत का कोई भी संस्थान न होने पर नाखुशी जताई है। उन्होंने इंडिया में हायर एजुकेशन का स्तर सुधारने पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने सामाजिक मूल्यों में आई गिरावट रोकने पर भी बल देते हुए विश्वविद्यालयों से आह्वान किया कि वह नैतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक अभियान चलाएं

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अपनी तीन दिनी मध्यप्रदेश यात्रा के दौरान भोपाल में स्थापित अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर मध्यप्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालयों को तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा और मार्गदर्शन हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में मुहैया कराने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

राष्ट्रपति श्री मुखर्जी ने कहा कि समाज और राष्ट्र के विकास में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारे विश्वविद्यालयों को नैतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अभियान चलाना चाहिए। हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि देश के युवा देश भक्ति, दायित्वों के निर्वाह, सभी के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन, जीवन में सच्चाई और ईमानदारी और अनुशासन आदि का पालन करने के प्रति तत्पर बनें

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