सुप्रीम कोर्ट का फैसला दागी नेताओं पर

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राजनीति में अपराधीकरण को रोकने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद देश के लगभग डेढ़ हज़ार नेताओं को अयोग्य ठहराए जाने का खतरा पैदा हो गया है. लगभग हर राजनीतिक पार्टी के इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित है. नेशनल इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के करीब 31 फीसदी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं. इनमें सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य शामिल हैं.
राजनीति के अपराधीकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को करारी चोट करते हुए फ़ैसला दिया है कि जिन नेताओं को 2 साल या उससे अधिक की सज़ा सुनाई जाएगी, उसकी सदस्यता सज़ा सुनाते ही रद्द हो जाएगी. इतना ही नहीं, क़ैद में रहते हुए किसी नेता को वोट देने का अधिकार भी नहीं होगा और ना ही वे चुनाव लड़ सकेंगे. क्योंकि जेल जाने के बाद उन्हें नामांकन करने का हक़ नहीं होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि यह आदेश तत्‍काल प्रभाव से लागू होगा. यानी अब ट्रायल कोर्ट में भी दोषी करार दिए जाने पर सांसदों या विधायकों को सदस्‍यता छोड़नी पड़ेगी और कोई नेता जेल से चुनाव भी नहीं लड़ पाएगा.

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