‘संजीवनी बाल मित्र केंद्र’:- सोशल पुलिसिंग का बढ़ता कदम

कहते हैं मनुष्य का ज्ञान उसका परम मित्र है अज्ञानता उसकी निकृष्ट शत्रु होती है। कुछ ऐसी ही सोच लेकर इंदौर के पुलिस विभाग के कुछ अफसरों ने ‘संजीवनी बाल मित्र केंद्र’ नामक संस्था सन 2002 में इंदौर कुछ थानों से प्रारंभ की उसमें से एक केंद्र थाना छत्रीपुरा के ऊपर चलाया जाता है। इनका उद्देश्य उन गरीब बच्चों को शिक्षा देना जो किन्हीं कारणों की वजह से अपनी नैतिक शिक्षा न ले पाए हो जिनमें कचरा बिनने वाले स्टेशनों (रेलवे) पर काम करने वाले और वो बच्चे जिनके माता या पिता का कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड रहा हो। सबसे अच्छी बात संस्था का सारा खर्च छत्रीपुरा थाना के सभी अधिकारी ही उठाते हैं, तथा कुछ समाजजन। इनके विचारों की शुद्धता का पता इससे ही चलता है कि केंद्र के हर बच्चे को अपने अधिकारों व देश के प्रति उनकी जिम्मेदारी का पता होना चाहिए, ताकि अज्ञानतावश व कोई अपराध न कर दे।
संस्था : कम्प्यूटर, गणित, इंग्लिश, सामान्य ज्ञान पर्यावरण, स्वास्थ्य जैसे विषयों का सामान्य ज्ञान बच्चों को एक साल में सिखाती है।
ये सभी विषयों को पढ़ाने के लिए अतिथि शिक्षक व कॉलेज के छात्रों का योगदान होता है। बच्चों की उम्र 8-14 वर्ष के बीच की होती है। अधिकतर क्योंकि संस्था का मानना है कि यही उम्र होती है, जिसमें बच्चा अपनी सोच को जन्म देता है। शिक्षा के साथ बच्चों को व्यक्तिगत विकास भी किया जाता है।
छत्रीपुरा थाने में संजय राठौरजी ने बातचीत में बताया कि संजीवनी बाल मित्र केंद्र की शुरुआत करने का मूल उद्देश्य कमजोर वर्ग के जरूरतमंद बच्चे, सड़कों पर कचरा बिनने वाले, स्टेशनों पर बूट पॉलिश करने वाले बच्चे जिनकी उम्र लगभग 8-14 वर्ष की होती है, जो कि अशिक्षा के कारण अपराधों में आसानी से लिप्त हो सकते हैं, उन बच्चों को यहां मित्रवत माहौल में कहानियां, खेल-कूद के माध्यम से शिक्षित किया जाता है तथा इसी के साथ उन्हें अपने देश के प्रति जागरुक भी किया जाता है। क्योंकि बच्चा जब अच्छा नागरिक बनेगा तो ही एक अच्छे देश का निर्माण होगा।
इसे हमने एक सुधार की एक छोटी सी पहल के रूप में शुरू किया है, यह बाल मित्र केंद्र मप्र के इंदौर में 2002 में शुरू हुआ तथा कई थानों में इसकी नींव रखी गई। उसमें से यह हमारा थाना भी शामिल है, यह थाने के लोगों द्वारा ही चलाया जाता है कभी-कभी समाज के लोग भी इसमें अपना सहयोग देते हैं। समाज के लोग व पुलिस का यह तालमेल उस उपेक्षित बच्चे के भविष्य को संवारने का का करता है।
भविष्य की नीति के बारे में जब हमने पूछा तो उनका जवाब यह था कि जो अभी केंद्र में 40-50 बच्चे है इनको संवारेंगे तथा ज्यादा से ज्यादा बच्चों को कम्प्यूटर, गणित, पर्यावरण, सामान्य ज्ञान, स्वास्थ्य का ज्ञान देंगे तथा एक अच्छे राष्ट्र के निर्माण की नींव रखेंगे।

By:- मनमोहन पटेल

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