प्रशासनिक कार्यों में न्यायालयों के निर्णयों का रखा जाये विशेष ध्यान

लोकायुक्त न्यायमूर्ति श्री पी.पी.नावलेकर ने कहा है कि मजबूत प्रशासन देने के‍लिए प्रशासनिक कार्यों में न्यायालयों के निर्णय का विशेष ध्यान रखा जाये। लोकायुक्त श्री नावलेकर गुरूवार को आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी में अखिल भारतीय एवं केन्द्रीय सेवा के ग्रुप ए के अधिकारियों के 15 सप्ताह के आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

लोकायुक्त श्री नावलेकर ने कहा कि प्रशासन में पारदर्शिता लाये जाने के उद्देश्य से सरकारी कार्यालयों में सूचना के अधिकार को लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि समय पर निर्णय न लेने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। प्रशासन अकादमी के महानिदेशक श्री आई.एस. दाणी ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में समाज में प्रशासन की परिभाषा बदली है, अब प्रशासक नियंत्रक नहीं बल्कि सुविधा प्रदाता हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रशासक नौकरशाह के रूप में नहीं, बल्कि प्रबंधक के रूप में कार्य करेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों को लोकतंत्र में एक लोक-सेवक के रूप में शासन का अंग रहते हुए जनता को परिणाम देने होंगे।

प्रशासन अकादमी के संचालक श्री राकेश अग्रवाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में अखिल भारतीय एवं केन्द्रीय सेवाओं के 65 अधिकारी ने अपना प्रशिक्षण पूरा किया है। इनमें भारतीय वन सेवा के 11 अधिकारी शामिल थे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के 22 राज्य के अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रज्ञा अवस्थी एवं प्रो. प्रमोद चतुर्वेदी द्वारा किया गया।

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