साल 2013 जिसमें हम मोबाइल हो गए

यह साल इसलिए जाना जाएगा क्योंकि इस साल हम सबके पास मोबाइल आ गया.
और हम सिर्फ़ स्मार्टफ़ोन और टैबलेट्स की बात नहीं कर रहे हैं. हम बात कर रहे हैं ऑफ़िस के अंदर और बाहर कनेक्ट रहने की और अपने उपकरणों का इस्तेमाल काम या खेलने के लिए करने की.हम बात कर रहे हैं मोबाइल डाटा की जो क्लाउड में स्टोर किया गया हो और मोबाइल कॉर्पोरेट ढांचे की को डाटा को शेयर करने की नई उम्र से सामंजस्य बनाने की कोशिश कर रहा है.मोबाइल यह सिर्फ़ एक उपकरण नहीं है बल्कि यह एक मनःस्थिति है.
और 4जी नेटवर्क की ताकत वाली इस गतिशीलता में व्यापार की संभावनाएं तो हैं ही लेकिन इसकी अपनी चुनौतियां भी हैं.हमारे ख़रीदारी करने, काम करने, रचनात्मकता और संवाद करने को मोबाइल ने बदल दिया है लेकिन बहुत से व्यापार इस नए प्रतिमान को स्वीकार करने में असफल रहे हैं.
जैसे कि पारंपरिक बाज़ार नए ऑनलाइन शॉपिंग के आगे धराशाई हो रहे हैं.वह कहते हैं, “दुनिया इतनी तेज़ी से बदल रही है कि हमारी बड़ी आईटी योजनाएं शुरू होने से पहले ही पुरानी पड़ जा रही हैं.”

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