सपनों को पढ़ने का तरीका

नींद के परीक्षणों के दूसरे दौर में शोधकर्ता दिमागी हलचलों को देखकर यह अनुमान लगाने में सक्षम थे कि प्रतिभागी नींद में क्या देख रहे हैं.

यह अनुमान कि जो तस्वीर प्रतिभागी देख रहा है वह किस ग्रुप की है, 60% तक सटीक रहे.प्रोफ़ेसर कामितानि कहते हैं, “हम सपनों में देखी गई चीजों को जानने में सफल रहे और प्रतिभागियों की बात ने इसका समर्थन किया.”अब शोधकर्ता गहरी नींद में झांकना चाहते हैं. माना जाता है कि उसमें सपने ज़्यादा सजीव होते हैं.वे यह भी जानना चाहते हैं कि क्या दिमाग के स्कैन उन्हें भावनाओं, गंधों, रंगों और लोगों के व्यवहार का अनुमान लगाने में सहायता कर सकते हैं.ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में कॉग्निटिव न्यूरोसाइंटिस्ट डॉक्टर मार्क स्टोक्स इस शोध को ‘उत्साहवर्धक’ बताते हैं, जो हमें सपनों को पढ़ने वाली मशीन बनाने के करीब ले आया है.
वह कहते हैं, “हालांकि अभी लंबा रास्ता तय करना होगा, लेकिन सिद्धांत रूप में यह संभव है. मुश्किल काम तो देखी जा रही चीज़ और दिमागी हलचल को सुनियोजित ढंग से मापने का है.”वह यह भी कहते हैं कि सपनों को पढ़ने का एक तरीका सबके लिए काम नहीं कर सकता.
डॉ स्टोक्स के अनुसार, “यह व्यक्तिगत रूप के किया जाना चाहिए. इसलिए आप ऐसा कोई सामान्य ढांचा नहीं बना सकते जो किसी के भी सपने पढ़ ले. अलग स्वभाव या प्रकृति के लोग हमेशा मौजूद रहेंगे, इसलिए लोगों की दिमागी हलचल कभी भी एक समान नहीं हो सकती.”
वह कहते हैं, “जैसे कि आप दूसरे के जाने बिना उसके विचार पढ़ने वाली कोई चीज़ कभी नहीं बना सकते.”

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