कृषि कंपनी ने बनाई है एसएमएस नियंत्रित सिंचाई प्रणाली.

कृषि की सबसे ज़रूरी मांग सिंचाई होती है और किसी सूखे इलाक़े के खेत को कृषि योग्य पानी पहुँचाना किसी बड़ी जद्दोजहद से कम नहीं है.

पानी और ऊर्जा बचाना वक़्त की अहम मांग है जिसके लिए एक कृषि कंपनी ने बनाई है एसएमएस नियंत्रित सिंचाई प्रणाली.

भारत में आम तौर पर खेतों में भूमिगत जल स्रोतों का प्रयोग होता है और इसके लिए वॉटर पंप लगाए जाते हैं जो ईंधन या बिजली से चलते हैं. ऐसे में 2-5 मिनट की देरी भी रोकना बूंद-बूंद से घड़ा भरने जैसा होता है.

‘नैनो गणेश’ नाम का ये सिस्टम एक एसएमएस से वॉटर पंप बंद कर सकता है. इसके लिए ना तो बहुत पढ़े-लिखे होने की ज़रूरत होती है और ना ही किसी महंगे स्मार्टफ़ोन की. एक सस्ता सा बेसिक मोबाइल ही काफ़ी होता है.

मोबाइल एजुकेशन

मोबाइल उन प्रयासों के लिए भी एक वरदान सरीखा साबित हो रहा है, जो शिक्षा को देश के दूर-दराज़ के इलाक़ों में पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं.
नोकिया और पीयरसन फाउंडेशन ने मिलकर बनाया है एक ऐसा सिस्टम जो डिजिटल इंटरैक्टिव शिक्षा को उन क्लासरूमों तक पहुंचा रहा है, जहां टीवी लगे हुए हैं.
स्कूलों में टीचर्स मोबाइल के ‘टीवी-आउट’ फ़ीचर के ज़रिए बच्चों को टीवी पर सैकड़ों ज्ञानवर्धक वीडियो दिखा सकते हैं. फिलहाल ‘ब्रिज इट’ तीन भाषाओं में करीब 15,000 बच्चों तक पहुंचता है.

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