इंटरनेट बैंकिंग ट्रांजैक्शन और भी सेफ

बैंकिंग कोड्स ऐंड स्टैंडर्ड्स बोर्ड ऑफ इंडिया (BCSBI) ने कस्टमर्स से किए गए वादे में बदलाव किया है और उसके मुताबिक, बैंकों को किसी भी ‘अनऑथराइज्ड’ ट्रांजैक्शन के लिए कहीं ज्यादा जिम्मेदारी लेनी होगी। यह बदलाव जनवरी से लागू हो गया है।
BCSBI कस्टमर्स के लिए बैंकों की ओर से किए जाने वाले वादों की गाइडलाइंस तैयार करने वाली संस्था है। इसके चेयरमैन ए. सी. महजन ने कहा कि अगर किसी कस्टमर को इंटरनेट बैंकिंग सिस्टम में सिक्यॉरिटी का घेरा टूटने के चलते कोई डायरेक्ट लॉस होता है और वह घेरा टूटने में कस्टमर का हाथ नहीं पाया जाता है तो उस नुकसान की भरपाई बैंक को करनी होगी। बैंकों को या तो यह साबित करना होगा कि कस्टमर की गलती के चलते उससे जुड़ी गोपनीय सूचना दूसरों के हाथ में गई या उन्हें नुकसान की भरपाई करनी होगी।

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