आधुनिक युग में नारी की दशा या स्थिति

आज के इस आधुनिक युग में नारी पुरुष से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है चाहे वह राजनीति का क्षेत्र हो या सामाजिक या व्यवसायिक या वैज्ञानिक या कला का क्षेत्र, नारी हर क्षेत्र में अपना एक अलग स्थान बना चुकी है। हमारे देश की ऐसी कई महान नारियां है जिन्होंने आसमान की बुलंदियों को छुआ है और देश का नाम रोशन किया है। उदाहरण के लिए स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी (प्रधानमंत्री), किरण बेदी (आई.पी.एस. अधिकारी), सुनिता विलियम्स, कल्पना चावला जो अंतरिक्ष की ऊँचाईयों तक पहुँच चुकी है। स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर (गायिका), हेमा मालिनी, राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटील, सुधा चंद्रन, माधुरी दीक्षित, ऐश्वर्याराय बच्चन जिन्होंने कला के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देकर इतिहास में अपना नाम स्वर्णीम अक्षरों में अंकित कर लिया है। पी.टी. उषा, सानिया मिर्जा ने खेल जगत में अपना नाम दर्ज किया है। मदर टेरेसा का नाम भी सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उल्लेखनीय है।
इतिहास भी इस साक्ष्य का गवाह है कि प्रचाीन काल में भी हमारे देश में कई ऐसी वीरांगना पैदा हुई है जिन्होंने देश की शान, गौरव, गरिमा को बनाये रखी है उनमें से महारानी लक्ष्मीबाई, कंठ कोकिला श्रीमती सरोजनी नायडू, अहिल्याबाई और ऐसी कई महान विभूतियाँ पैदा हुई है जिन पर हमारे देश को गर्व होता है।
अति प्राचीन काल में साधारणतया नारियों का क्षेत्र सिर्फ घर की चार दीवारी तक ही सीमित था, परन्तु आज के इस आधुनिक युग में नारी जहां पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग प्रदान कर रही है और वास्तव में देखा जाए तो कई क्षेत्रों में नारी पुरुषों से भी आगे है।
इसके बावजूद भी इस आधुनिक युग में हमारा समाज एक पुरुष प्रदान समाज है आज के युग में नारी चाहे कितने ही बड़े मुकाम पर पहुंच जाय वह नारी ही है। हमारा समाज कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए लोगों की मानसिकता आज भी वही रूढि़वादियों में जकड़ी हुई है। आज भी यह देखा जा रहा है कि लड़कियों, औरतों के साथ बहुत अत्याचार हो रहे है आज भी आये दिनों अखबार व टी.वी. में यह देखने, पडऩे, सुनने को मिलता है कि ससुराल वालों ने दहेज की मांग पूरी न होने पर बहू को जिन्दा जला दिया, कई घरों में यह देखा जा रहा है कि औरते घर का काम सम्भालती है, आफिस भी जाती है बच्चे, घर के बुजुर्ग, पति का भी ध्यान रकती है इसके बाजूद भी उसका अस्तित्व घर में न के बराबर होता है। शिक्षित परिवारों में भी भ्रूण हत्या के मामले देखने को मिल रहे हैं।
ऐसी स्थिति में और ऐसे आधुनिक युग में आवश्यकता है हमें अपनी मानसिकता को बदलने की।
हमारे भारतीय संविधान में भी औरत और आदमी को समान अधिकार दिये गए है इसके बावजूद भी हमारा समाज इस बात को स्वीकार नहीं करता है।
अत: मेरा समाज से, इस देश से यह अनुरोध है कि बदलते परिवेश में नारियों की स्वतंत्र मानसिकता को स्वीकार किया जाए क्योंकि आज की नारी अबला नहीं सबला है, मैं यह बात समाज से पूछना चाहती हूं कि देश तो स्वतंत्र हो गया है परन्तु हमारी मानसिकता कब स्वतंत्र होगी क्योंकि देश की अखंडता, एकता व देश के सर्वांगीण विकास में नारी जाति का बहुत बड़ा योगदान है और यह योगदान कायम रहे इसके लिए देश, समाज को अपनी मानसिकता बदलनी होगी क्योकि नारी पूज्यनीय है, सम्माननीय है।
कहा भी गया है
नारी का सम्मान करो
मत इसका अपमान करो
वह जब जिद पर आती है
एक तूफान उठाती है
वह काली (दुर्गा) बन जाती है।
साधारणतया: यह देखा गया है कि जिस घर नारी का सम्मान नहीं होता नारी का शोषण होता है वह घर नर्क बन जाता है एवं नष्ट हो जाता है।
कहा भी गया है-
या देवी सर्वभुतेषु, नारी रुपेण संस्थित:
नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नम: ।।

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