हम चाहतें है बच्चे अपने आपको समझे- स्मिता राठौर

आज के समय में बच्चों का किस तरह की शिक्षा दी जाए एवं स्कूल पैरेंट्स व बच्चों में किस तरह की बोडिंग होनी चाहिए इन्हीं पहलुुओं पर हमने बात की आईपीएस प्रिसिंपल स्मिता राठौर से….
अपने स्वभाव से बहुत ही नम्र व समझदार इंदौर पब्लिक स्कूल की प्रिसिंपल स्मिता राठौर का कहना है कि वे चाहती है कि बच्चे सबसे पहले खुद पर भरोसा करना सीखे और अपने आपको समझे की वे क्या कर सकते है। एक प्रिसिंपल होने के नाते उन्होंने कहा कि वे टीचर्स से ये उम्मीद करती है कि वे बच्चों में आत्मविश्वास भरे और बच्चों को कम्फटेबल बनायें। बच्चों की जिंदगी जीने के लिए प्रिप्रेर किया जाए और उन्हें वही करने दिया जाए जो वो चाहते हैं एवं उन्हें किताबी कीड़ा न बनाया जाए। उन्होंने बताया कि आईपीएस पेरेंट्स को भी सेंशन देता है जहाँ वे पैरेट्स से बाते करे उनके बच्चों के भविष्य की चर्चा करता है। उनका मानना है कि माता-पिता को कभी अपने बच्चों पर किसी भी चीज को करने का दबाव नहीं बनाना चाहिए। उनके मुताबिक आईपीएस अपने स्टूटेंड्स को हर एक विषय पर ना सिर्फ रटवाकर कार्य करवाना चाहता है बल्कि बच्चे हर कार्य को प्रेक्टिकल सीखकर समझने की कोशिश करें। यह भी कहा कि हम बच्चों को अच्छा इन्फ्रास्ट्रक्चर और अच्छी फेक्लटिस देकर हर बच्चे पर इन्डीव्यूज्वल एटेंशन देते हैं। वे कहती है कि स्टूडेंट को किसी भी स्थिति में डिप्रेशन का शिकार नहीं होना चाहिए। आज के स्टूडेन्स से वे यह कहना चाहती है कि हर बच्चे को खुद पर यकीन करना चाहिए एवं सभी पैरेंट्स और टीचर्स को बच्चे की काबिलियत समझकर उसे प्रोत्साहित करना चाहिए।
-दिव्या पस्टारिया

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