सपने यहां भी सजते हैं

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बपचन जिंदगी का सबसे खुबसुुरत लम्हा, जहाँ मस्ती होती है, खिलौैने होते हैं, शरारतें होती है। कभी माँ के आंचल में लोरी सुनकर सोना तो कभी पिता की ऊंगली पकड़कर मेले में जाना यही तो होती है एक नन्हें से बच्चे की जिंदगी। स्कूल में दोस्तों के साथ लंच बांटकर खाना, तो कभी अपनी पेसिंल की नोंक टुटने पर टीचर से शार्प करवाना। लेकिन सबका बचपन खिलौनो के साथ, विडियो गेम्स के साथ या एक अच्छे स्कूल में पढ़ककर आराम से जिंदगी बीते यह जरुरी नहीं होता, लेकिन सपने सभी सजाते हैं। ऐसा ही एक सपना लिए अपने बचपन को मेहनत करके गुजारने वाले एक बच्चे से हमने बात की जिसका नाम समीर है। समीर महज 10 साल का है और राजवाडा पर खिलौने बेचता है। उसने बताया कि वो सुबह स्कूल जाता है इसके बाद 3 बजे से 8 बजे तक राजवाड़ा पर खिलौने बेचता है। अब वो 5वीं कक्षा में है और 4थी कक्षा 80 प्रतिशत से पास की। उसके पिता और बड़ा भाई जो 15 साल का है वो भी खिलौने बेचते हैं। अपने चेहरे पर बहुत ही प्यारी सी मुस्कार और अपने चेहरे पर बहुत रौैनक के साथ समीर कहता है कि बड़ा होकर वो पुलिस आफिसर बनना चाहता है ताकि देश को कोई परेशान ना आए। समीर को टी.वी. देखना बहुत पसंद है और दिन भर में कड़ी मेहनत के बाद 100 रु. कमा कर वह अपने सपनों की ओर कदम बढ़ा रहा है। इस नन्हें से जज्बे को हमारा सलाम।
– दिव्या

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