लॉर्ड्स में भारत की जीत के नायक..

भारत ने इंग्लैंड को लॉर्ड्स में हुए दूसरे टेस्ट में 95 रनों से हरा दिया है. क्रिकेट के मक्का में 28 साल बाद मिली इस जीत की अहमियत और नायकों पर एक नज़र. लॉर्ड्स के मैदान पर भारतीय टीम की यह दूसरी जीत थी. इससे पहले भारत ने यहां 1986 में कपिल देव की कप्तानी में जीत हासिल की थी. तेज़ गेंदबाज़ ईशांत शर्मा को समझ ही नहीं आ रहा था कि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी उन्हें लगातार बाउंसर डालने को क्यों कह रहे हैं, लेकिन जब नतीजा देखा तो उनकी झोली में सात विकेट थे और यह उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था. आजिंक्य रहाणे ने लॉर्ड्स में वो कारनामा कर दिखाया जो सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर भी नहीं कर सके. उन्होंने पहली पारी में शतक जड़कर लॉर्ड्स के शतकवीर के रूप में अपना नाम दर्ज करा लिया. मौजूदा भारतीय टीम के अधिकतर खिलाड़ी पहली बार लॉर्ड्स में उतरे. सिर्फ़ कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और उपकप्तान विराट कोहली को ही यहां खेतेज़ गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार के लिए यह टेस्ट यादगार था. वह लगातार दो टेस्ट में एक पारी में पांच विकेट और हाफ़ सेंचुरी बनाने वाले तीसरे ऑल राउंडर बन गए हैं. इससे पहले, ये रिकॉर्ड रिचर्ड हेडली और इयन बॉथम के नाम दर्ज था.लने का अनुभवर्ष 2011 से भारत ने विदेशी सरज़मीं पर पहली बार टेस्ट जीता. भारत ने पिछला टेस्ट जून 2011 में वेस्टइंडीज़ को किंगस्टन में 63 रन से हराकर जीता था.व है. वर्ष 1986 के बाद लॉर्ड्स में भारत की ये पहली जीत है. कपिल देव के नेतृत्व में भारत ने तब लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड को पांच विकेट से हराया था. कपिल भी इस ऐतिहासिक जीत के गवाह बने. दरअसल, चौथे दिन का खेल उन्होंने घंटी बज़ाकर शुरू कराया.

    'No new videos.'

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *