750 साल पुराने पोटली वाले गणेश, हल्दी गांठ से पूरी होती मन्नत

जूनी इंदौर में शनि मंदिर के पास 750 साल पहले राजस्थान से आए गड़रियों ने सिद्धी विनायक गणेश की स्थापना की थी। ढ़ाई फिट की गणेश जी की यह एकमात्र ऐसी मूर्ति है जिसमें उनके हाथ में धन की पोटली है। इसी वजह से इन्हें पोटली वाले सिद्धी विनायक गणेश कहा जाता है। यह मूर्ति गडरियों ने खुद ही बनाई थी। 1000 वर्ग फिट में फैले मंदिर को अब राजस्थानी कारीगर गणेश महल का रूप दे रहे हैं। हल्दी की गांठ पूजने से हो जाता है विवाह- पुराणिक परिवार के पूर्वज कई सालों से पोटली वाले गणेश की पूजा कर रहे हैं। सालों से यहां हल्दी की गांठ से मन्नत पूरी होती है। पांच साल पहले सवा लाख हल्दी गांठों से यहां पर गणेश जी की अर्चना की गई थी। यही गांठें लोगों की मन्नत पूरी करने के लिए दी जा रही हैं। जिन लोगों के विवाह में या अन्य किसी कार्य में बाधा होती है, उन्हें गुरूवार के दिन यहां से सिद्ध की हुई हल्दी की गांठ दी जाती है। इस गांठ को पीले कपड़े में लपेटकर पूजा करने से बाधाएं दूर होती हैं और अविवाहितों का शीघ्र विवाह हो जाता है। धन की पोटली है गणेश के हाथ में- 750 साल पहले राजस्थान से आए गड़रियों ने अपने हाथ से सिद्धी विनायक गणेश की मूर्ति बनाकर यहां स्थापित की थी। यह गणेश जी की एकमात्र ऐसी मूर्ति है जिसके हाथ में धन की पोटली है। इसी वजह से इन्हे पोटली वाले सिद्धी विनायक गणेश के नाम से जाना जाता है। मंदिर से प्राप्त सिद्ध की हुई हल्दी की गांठ पीले कपड़े में लपेटकर पूजन करने से शीघ्र विवाह होता है और अन्य कार्यों की बाधाएं दूर होती हैं।

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