250 से अधिक फिल्में करने वाले सदाशिव अमरापुरकर नहीं रहे

ऑटो ड्राइवर से एक्‍टर बन कर बतौर विलेन दर्शकों के दिल में छा जाने वाले हिंदी और मराठी फिल्मों के अभिनेता सदाशिव अमरापुरकर का लंबी बीमारी के बाद मुंबई में निधन हो गया। कुछ दिन पहले उन्हें गंभीर हालत में मुंबई के कोकिलाबेन धीरूबाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले कुछ हफ्तों से अमरापुरकर के फेफड़े में संक्रमण था। बीते शनिवार को उनकी हालत नाजुक हो गई थी। इसके बाद उन्हें लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन संक्रमण बढ़ जाने के कारण उनकी मृत्यु हो गई। सोमवार तड़के करीब तीन बजे उन्‍होंने आखिरी सांस ली। उन्हें दो हफ़्ते पहले भी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अंतिम संस्कार मंगलवार शाम 4 बजे महाराष्ट्र के अहमदनगर में होगा। अमरापुरकर ने करीब 250 फिल्में की हैं, जिनमें ‘अर्धसत्य’, ‘सड़क’, ‘हुकूमत’, ‘आंखें’ और ‘इश्क’ काफी कामयाब रहीं। 1984 में आई ‘अर्धसत्य’ के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर की कैटेगरी में फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था। 1991 में आई ‘सड़क’ के लिए उन्हें बेस्ट विलेन की कैटेगरी में फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था। अमरापुरकर को आखिरी बार 2012 में आयी फिल्म ‘बाम्बे टाकीज’ में अभिनय करते हुए देखा गया था। सदाशिव ने जीटीवी के सीरियल ‘शोभा सोमनाथ की’ में एक तांत्रिक रूद्रभद्र का चरित्र निभाया था, जो कि इस सीरियल का सबसे बड़ा खलनायक है। इसके अलावा उन्होंने अमाल अलना निर्देशित सीरियल ‘राज से स्वराज तक’ के चार एपीसोड में लोकमान्य तिलक का किरदार निभाया था। अमरापुरकर ने श्याम बेनेगल निर्देशित सीरियल ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ के चार एपीसोड में ज्योतिबा फुले का चरित्र निभाया था। उन्होंने मराठी सीरियल ‘कुलवधू’ में भी अभिनय किया था। टीवी और फिल्मों के अलावा अमरापुरकर ने तुकाराम के भजनों पर आधारित चार सौ साल पुराना एक नाटक किया था जिसमें संगीत व नृत्य भी था।

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