कलाकार वाजिद अली खान ने ली वर्कशॉप

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इंदौर. एक बच्चा जिसकी आंखों से आंसू अभी छलके ही हैं… बस कुछ पल और… और वह बिलख पड़ेगा। बच्चे के चेहरे के इन भावों को शहर के एक चितेरे ने अनोखे अंदाज़ में साकार किया है। चितेरा जो कैनवस, कूची और रंगों की जगह लकड़ी पर कीलों से कल्पनाएं उकेर रहा है। यह कलाकार हैं शहर के वाजिद अली खान। प्लाय पर कीलों से बनाने के अपने इस हुनर को वाजिद पेटेंट भी करा चुके हैं। अब वे सर्जिकल इक्विपमेंट्स से तस्वीरें बना रहे हैं। फिलहाल जो आर्टवर्क वे तैयार कर रहे हैं वह एक बच्चे का पोर्ट्रेट है। इस आर्ट के लिए भी उन्होंने पेटेंट फाइल किया है। पिछले दिनों उन्होंने वर्चुअल वाेऐज में वर्कशॉप ली और स्टूडेंट्स को पेटेंट के फायदे बताए। वाजिद ने स्टूडेंट्स से कहा कि मेरे घर में फर्नीचर का काम होता था। कीलें और लकड़ी आसानी से मिल जाया करती थीं, इसलिए मैं इनके साथ एक्सपेरिमेंट करता रहा। एक दिन कुछ ठीकठाक आकृति बन गई और तभी से मैंने यह काम करना शुरू किया। युवा मन में कई कल्पनाएं जन्म लेंगी। इन पर पाबंदियां न लगाएं। सोच को उन्मुक्त उड़ने दें। वाजिद ने 2012 में पेटेंट फाइल किया था। अब उन्हें कीलों के आर्ट के लिए पेटेंट मिल चुका है। उन्होंने स्टूडेंट्स से कहा कि पेटेंट अपने इनोवेशन को कानूनी तौर पर अपना कहने का ज़रिया है। नेल आर्ट के बारे में कोई भी इंटरनेट पर देखेगा तो मेरा नाम इसे बनाने वाले सबसे पहले आर्टिस्ट के तौर पर सामने आएगा। यह फायदेमंद भी है। जो पेंटिंग पहले 1 लाख में नहीं बिक रही थी, वह अब 50 लाख रुपए में बिक रही है। वाजिद खान की यह पेंटिंग इन मेकिंग है। उन्होंने सभी टूल्स लॉजिक के साथ इस्तेमाल किए हैं। जैसे आंख उन्हीं टूल्स से बनाई है जो की आंख की सर्जरी में काम आते हैं।

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