दोनों को जोड़कर करती है चित्रकारी

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हरसूद. जब सुरभि ने जन्म लिया तो खंडवा जिले के हरसूद में रहने वाले भोरगा परिवार के सदस्यों की आंखों में आंसू थे, खुशी के नहीं दुख के क्योंकि उसके दोनों हाथों में सिर्फ दो अंगुलियां थीं। जन्म से ही सुरभि के हाथ-पैर में कुल छह अंगुलियां हैं। दोनों हाथों में मात्र एक-एक (कनिष्का) तथा पांवों में अंगूठे और कनिष्का अंगुलियां हैं। सुरभि नर्सरी की छात्रा है। अंगुलियों की कमी के बावजूद वह सब कुछ लिखने के साथ अच्छी ड्राइंग भी बना लेती है। सुरभि पढ़ाई व भोजन में दोनों हाथों का उपयोग करती है। लिखते समय मुट्ठी बनाकर पेंसिल चलाती है। पिता ने बताया रोटी चूरकर देते हैं, लेकिन खाती वह अपने हाथ से ही है। मीठी मुस्कान वाली सुरभि को ड्राइंग, पेंटिंग, मेहंदी और रंगोली बनाने का शौक भी है। सुरभि नर्सरी क्लास में सभी बच्चों में काफी एक्टिव है। स्कूल स्टाफ के मुताबिक छोटी उम्र के बच्चे अकसर कक्षा में सो जाते हैं, किंतु सुरभि हमेशा कॉपी-किताब में एकाग्रचित्त रहती है। सुरभि के पिता शिवप्रसाद ने बताया जन्म के बाद कई डॉक्टरों से परामर्श लिया। उनके मुताबिक सुरभि के हाथ-पैर की अंगुलियों को ऑपरेशन के जरिये ठीक किया जा सकता है। इसके लिए सुरभि की उम्र 10 साल होना जरूरी है। खर्च भी 30 से 35 लाख रुपए का आएगा।

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