टाइमिंग से गुदगुदाया

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इंदौर. रोचक स्क्रिप्ट, चुटीले संवाद, परफेक्ट टाइमिंग और कल्पनाशील आंगिक अभिनय के साथ फिल्म एक्टर शरमन जोशी की असरदार संवाद अदायगी से राजू राजा राम और मैं हास्य नाटक प्रभावी रहा। रविवार की शाम यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम रस-भारती और कला अभिव्यक्ति के बैनर तले डीएवीवी ऑडिटोरियम में इसका मनोरंजक मंचन किया गया। उ‌द्योगपति मदन मनसुखानी की उनकी दूसरी पत्नी और पत्नी का प्रेमी सेक्रेटरी हत्या कर देते हैं। मनसुखानी की अस्पष्ट वसीयत के लिए एक से अधिक दावेदार सामने आते हैं। ये मनसुखानी के ज़िन्दा होने के लिए षड्यंत्र रचते हैं और दिवंगत उद्योगपति की ही शक्ल-सूरत वाले व्यक्तियों को मनसुखानी बना कर पेश करते हैं। अंत में पर्दाफाश होता है। ख्यात फिल्म अभिनेता शरमन जोशी ने चार किरदारों को अलग-अलग संवाद-शैलियों और आंगिक अभिनय के जरिए जीवंत किया। हालांकि उनकी सेलिब्रिटी वेल्यू नाटक पर हावी रही। वे एक ही व्यक्ति के चार किरदारों में स्पीड और बिना किसी जर्क के मंच पर जिस तरह हाज़िर होते हैं, वह मनोरंजक भी था और उनकी एक्टिंग की रेंज का परिचायक भी। राजेश भोंसले,राजेश दुबे,राजेश सिंह,नव्या सक्सेना,प्रदीप वनगुर्लेकर,शिवानी कराड़कर और ईशा वधनेकर ने भी अच्छा अभिनय किया। निर्देशक केदार शिंदे ने नाटक की दृश्य रचना इस तरह से की कि मंच के हर कोने का कल्पनाशील इस्तेमाल किया गया। एक्टर्स पर निर्देशकीय नियंत्रण से हास्य और सस्पेंस की सिचुएशन क्रिएट की गईं। सुरुचिपूर्ण मंच सज्जा के साथ सुविचारित प्रकाश योजना ने नाटक के प्रभाव में इजाफा किया।

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