टाइगर बिहारी खाता था तीन टाइम खाना

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इंदौर. कमला नेहरु प्राणी संग्रहालय में पिछले 23 साल से दर्शकों के चहेते टाइगर बिहारी की स्थिति और बिगड़ गई है। वह शुक्रवार सुबह से आंखें नहीं खोल रहा है। वह उठ भी नहीं पा रहा है, उसे ठंड लग गई है। इतना ही नहीं खाना भी बंद कर दिया है। प्रबंधन का कहना है कि ऐसी स्थिति में उसका बचना मुश्किल है। दरअसल उसने चलना-फिरना बंद कर दिया है। ठंड के कारण भी उसकी हालत खराब है। प्रबंधन उसकी देख-रेख कर रहा है। उसे दवाइयां दी जा रही है। बिहारी का जन्म 1991 में जू में ही हुआ था। यह टाइगर सागर और माया की संतान है। खास बात यह है कि लगभग 15 साल तक यह दर्शकों का चहेता रहा। 1995 के 1998 तक बिहारी की दहाड़ आसपास के एरिया में सुनाई देती थी। उसे देखने दर्शक न केवल आसपास के इलाकों बल्कि धार-झाबुआ से भी आते थे। फिलहाल उसने खाना-पीना भी कम कर दिया है। इसलिए उसे वेटरनरी डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। उसे रोजाना इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। चिड़ियाघर के पुराने कर्मचारियों का कहना है कि बिहारी जू का वह लोकप्रिय जानवर है जो बेहद फुर्तीला था। वह जू में सबसे ज्यादा मांस खाता था। उसे तीन टाइम खाना दिया जाता था। कभी-कभी वह इतना गुस्से में होता था कि खाना देने के लिए कर्मचारी को उसका गुस्सा शांत होने का इंतजार करना पड़ता था। फिलहाल वह पूरी तरह मायूस हो चुका है। उसकी हालत खराब है। वैसे टाइगर की औसत उम्र 18 साल तक होती है लेकिन बिहारी 23 साल 3 माह का हो चुका है।

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