कैनवास पर धागों से बुनी कविताएं

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कैनवाससे बनाए पन्ने और उन पर रंगीन धागों से मानवीय स्पर्श के साथ बुनीं कल्पनाएं। कुछ कविताएं बुनीं कुछ लम्हे सिए। काव्य पंक्तियां और कैनवास पर ही कपड़ों की कतरनों से बनाई गईं कृतियां। इन सबसे मिलकर स्पंदित 12 काव्य पंक्तियों की एक अनूठी किताब। ये काव्य पंक्तियां ख्यात कवि-आलोचक अशोक वाजपेयी की हैं। और इन्हें कपड़ों की कतरनों, कैनवास और धागों से सुंदर आकार दिया है शहर के चित्रकार सीरज सक्सेना और भारती दीक्षित ने। संभवत: यह अपनी तरह की पहली कैनवास-किताब है।

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