चीन में सराहा गया शहर की आर्किटेक्ट का बनाया ओल्ड ऐज होम डिज़ाइन

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इंदौर. चीन में हाल ही में चाइना इंटरनेशनल रीयल एस्टेट एंड आर्किटेक्चरल टेक्नोलॉजी फेयर हुआ। इसमें दुनियाभर के डेवलपर्स, आर्किटेक्ट्स और रीयल एस्टेट लीडर्स ओल्ड ऐज होम्स और हाउज़िंग में लाए जाने वाले बदलावों पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित थे। इंदौर की रहनेवाली मानवी व्यास को भी इसमें बुलाया गया। मानवी आर्किटेक्ट हैं और फिलहाल पुणे ���ें कार्यरत हैं। उन्होंने ओल्ड ऐज होम का ईकोफ्रेंडली डिज़ाइन प्रेज़ेंट किया। पिछले साल मानवी यूएन हेडक्वार्टर्स में यह प्रेज़ेंटेशन दे चुकी हैं। एक ऐसा ओल्ड ऐज होम जो ग्रीन आर्किटेक्चर के मुताबिक बना है। यहां रहनेवाले बुजुर्ग अपने गुज़र-बसर के लिए खुद काम कर रहे हैं। जहां उम्र के इस पड़ाव पर अपनों से अलग होकर भी वे किसी पर आश्रित नहीं हैं। वे उसी गर्व और स्वाभिमान से जी रहे हैं जैसे अब तक जीते आए हैं। मानवी की कल्पनाओं में ऐसा ही ओल्ड ऐज होम है। उनका मानना है कि वैसे तो ओल्ड ऐज होम्स की जरूरत ही नहीं पडऩा चाहिए, लेकिन वास्तविक स्थिति हम सभी के सामने है। अगर बुजुर्ग़ों के सामने ऐसी परिस्थितियां खड़ी हो भी जाएं तो वे उसी डिग्निटी से अपनी लाइफ जिएं जैसी वे अब तक जीते आए हैं। मैंने अपना प्रोजेक्ट इसी सेंटिमेंट से बनाया है।

हम अब भी एक्सप्लोरिंग स्टेज पर हैं

मानवी बताती हैं कि हमारे देश में ओल्ड ऐज होम्स में सीनियर सिटीज़ंस की तादाद बढ़ती जा रही है, लेकिन इस मामले में हैं हम बहुत पीछे। बाकी देश इस मामले में बहुत गंभीरता से काम कर रहे हैं। हमारे यहां ओल्ड ऐज होम्स बदहाल हैं। हाउज़िंग में भी हम अब भी एक्सप्लोरिंग स्टेज पर ही हैं। इसकी डेफिनेशन लगातार चेंज हो रही हैं। हमें लगातार बदलाव करने की ज़रूरत है।

इंडियन कल्चर बना इंस्पिरेशन

प्रोजेक्ट में मानवी ने यह सजेस्ट किया है कि ओल्ड ऐज होम में रहने वाले सदस्य फाइनेंशियली किसी पर भी निर्भर नहीं रहेंगे। वे खुद कमाएंगे। इस बारे में मानवी ने बताया कि भारतीय परवरिश से उन्हें काफी मदद की। भारत में ज्यादातर घरों में अचार नानी-दादी के हाथ का बना ही खाया जा रहा है। यह ट्रेंड आज भी नहीं बदला है। वे बुनाई में भी परफेक्ट होती हैं। इन रवायतों ने मुझे प्रेरित किया। मैंने इंदौर में इस विषय पर केस स्टडी भी की। मैंने प्रोजेक्ट में यह प्रपोज़ किया कि ओल्ड ऐज मेम्बर्स अर्निंग के लिए ये काम कर सकते हैं ताकि वे फाइनेंशियली सिक्योर रहें। साथ ही उन्हें यह न लगे कि वे किसी पर आश्रित हैं। कुछ एक्टिविटी और सोशल इन्वॉल्वमेंट बना रहेगा तो डिप्रेशन नहीं आएगा।

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