एनबीए सर्टिफिकेट- कॉलेजों को ही मिलेगी इंजीनियरिंग सीटें बढ़ाने की मंजूरी

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भोपाल. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) सत्र 2015-16 के लिए केवल उन्हीं इंजीनियरिंग कॉलेजों को नए कोर्स शुरू करने और पुराने कोर्स की सीटों बढ़ाने की मंजूरी देगा, जो नेशनल बोर्ड आॅफ एक्रेडिटेशन (एनबीए) से मान्यता प्राप्त होंगे। एआईसीटीई ने नए सत्र के लिए जो अप्रूवल प्रोसेस हैंडबुक जारी की है उसमें इस बार कॉलेजों को इंजीनियरिंग सहित अन्य प्रोफेशनल कोर्स की मान्यता देने के लिए नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्णय लिया है। इंजीनियरिंग कॉलेजों से मिली जानकारी के अनुसार तीन साल पहले एआईसीटीई ने सीटों में वृद्धि के लिए एनबीए के सर्टिफिकेट से छूट दे दी थी। इसी कारण पिछले तीन सालों में मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग की सीटों में हर साल वृद्धि हुई थी। सीट वृद्धि के साथ ही पिछले कुछ सालों में प्रवेश की संख्या घटने और गुणवत्ता में कमी आने के बाद अब एआईसीटीई ने इस बार नियमों में सख्ती लाने का फैसला किया है। कॉलेजों को अप्रूवल के लिए किए जाने वाले आवेदनों में अपने एनबीए स्टेट्स का भी जिक्र करना पड़ रहा है। प्राइवेट कॉलेजों के संचालकों ने एआईसीटीई की इस पहल को गुणवत्ता के लिए जरूरी बताया है। तीन साल पहले तक एआईसीटीई केवल उन्हीं कॉलेजों को संबंधित कोर्स की सीटें 180 तक करने की मंजूरी देता था जिनके पास एनबीए का सर्टिफिकेट होता था। इस नियम में थोड़ी ढील देने के कारण प्रदेश के ही कई कॉलेजों ने कुछ कोर्स की सीटें 300 तक बढ़ा ली थीं। नतीजा यह रहा कि इन सीटों का भरना तक मुश्किल होने लगा है। कॉलेज अब इन्हीं सीटों को सरेंडर कर रहे हैं। तीन साल पहले तक प्रदेश के करीब पचास फीसदी कॉलेजों के पास एनबीए का सर्टिफिकेट था, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद ज्यादातर कॉलेजों ने मूल्यांकन के लिए आवेदन ही नहीं किया है। फिलहाल पांच फीसदी कॉलेजों के ही पास नए मापदंड के मुताबिक एनबीए का सर्टिफिकेट है।

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