ट्रैक पर प्रोजेक्ट: जमीन मिलते ही फाइनल हो जाएगी मेट्रो की डीपीआर

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इंदौर. इंदौर-भोपाल में प्रस्तावित लाइट मेट्रो प्रोजेक्ट ने अब ट्रैक पकड़ लिया है। बुधवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में हुई बैठक में मेट्रो की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) पर बात हुई। बताया गया कि दोनों शहरों से डिपो की जमीन मिलना और यूटिलिटी (पानी, सीवरेज, ड्रेनेज, बिजली व अन्य केबल) की जानकारी और इस्टीमेट आना शेष है। यह मिलते ही डीपीआर फाइनल हो जाएगी। इन दोनों बिंदुओं पर चर्चा के लिए 18 फरवरी को विभाग के प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा की अध्यक्षता में फिर बैठक होगी।

नगरीय प्रशासन विभाग में ट्रांसपोर्ट के ओएसडी कमल नागर ने बताया मंत्री विजयवर्गीय ने लाइट मेट्रो, स्मार्ट सिटी, दृष्टि-2018, स्वच्छ भारत सहित कुछ अन्य मुद्दों पर बैठक आयोजित की थी। इंदौर कलेक्टर ने डिपो की जमीनों के लिए पड़ताल शुरू कर दी है।
भोपाल के लिए विभाग ने पत्र लिख दिया है। यह जानकारी मिलते ही मंत्री और मुख्य सचिव के सामने प्रेजेंटेशन होगा। इसके बाद कंसल्टिंग कंपनी अलाइनमेंट फाइनल करेगी और डीपीआर कैबिनेट में रख दी जाएगी।
बैठक में स्मार्ट सिटी पर भी बात हुई। मंत्री ने ऐसे एरिया चिह्नित करने के लिए कहा है जो मेट्रो रूट पर हों और स्मार्ट सिटी के लिए भी उपयुक्त हों। इससे दोनों के एक जैसे प्रावधान रखे जा सकेंगे। स्वच्छ भारत अभियान को प्रदेश के प्रमुख शहरों में लागू करने पर भी मंत्री ने अफसरों से चर्चा की।
2021 में 280 करोड़ रुपए प्रति किमी हो जाएगी लागत
कंपनी ने निर्माण कार्य की अधिकतम समय-सीमा 7 साल रखी है। उसने महंगाई दर 8 फीसदी मानते हुए वर्ष 2021 तक के लिए प्रोजेक्ट लागत का फिर से आकलन किया है। पहले कंपनी ने वर्ष 2014 के हिसाब से प्रति किमी 181 करोड़ रुपए लागत बताई थी, लेकिन वर्ष 2021 तक काम पूरा करने पर यह लागत 280 करोड़ प्रति किमी रही है।
प्रथम चरण का काम जुलाई से
सरकार ने लाइट मेट्रो के लिए डीपीआर बना रही रोहित एसोसिएट्स और एलआरटीसी कंपनी को जनवरी 2015 तक डीपीआर बनाने के लिए कहा था जो कंपनी ने पूरा कर दिया। अब सिर्फ डिपो और यूटिलिटी के इस्टीमेट को डीपीआर में शामिल करना है। कंपनी डीपीआर के साथ इंदौर-भोपाल में जियो-टेक्निकल सर्वे भी कर चुकी है।
इससे यह फायदा होगा कि जो भी कंपनी मेट्रो का रूट तैयार करेगी, उसे टेंडर लेने के बाद जमीनी मशक्कत नहीं करना होगी। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही जुलाई 2015 में प्रथम चरण का काम शुरू होने की उम्मीद है।
टैक्स में छूट मिले तो घटे लागत
कंपनी ने डीपीआर में सरकार को मेट्रो निर्माण से जुड़ी चीजों पर टैक्स हटाने का प्रावधान रखा है। यदि सरकार इसे मान लेती है तो लागत प्रति किमी 230 करोड़ रुपए रह जाएगी। दो स्टेशनों के बीच की दूरी 500 से 800 मीटर रखी गई है। डीपीआर में 60 फीसदी हिस्से में फंड की व्यवस्था, शहरी विकास से जुड़े कानूनों में सुधार, सिटी डेवलपमेंट प्लान आदि होंगे। इस पर केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद काम तेज हो जाएगा।

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