भोपाल-इंदौर के बीच बनेगा इकोनॉमिक सुपर कॉरिडोर, हाईस्पीड ट्रेन चलाने का प्रस्ताव

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भोपाल. दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की तर्ज पर राज्य सरकार ने भोपाल और इंदौर के बीच इकोनॉमिक सुपर कॉरिडोर बनाने की तैयारियां शुरू कर दी है। कॉरिडोर में स्मार्ट सिटी जैसे छह नए शहर बनाने का प्रस्ताव है। मौजूदा फोरलेन रोड के दोनों ओर आधे से एक किमी के दायरे में कॉरिडोर बनाया जाएगा। कॉरिडोर पर ढाई से तीन लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
पिछले साल अक्टूबर में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में इस कॉरिडोर का प्रेजेंटेशन किया गया था। इसके बाद विश्व बैंक के साथ हुई चर्चा में इसे प्रारंभिक मंजूरी मिल गई है। इसका विस्तृत सर्वे करने के लिए वर्ल्ड बैंक की तीन सदस्यीय टीम बुधवार से प्रदेश के दौरे पर आ रही है। यह टीम बुधवार को इंदौर में और गुरुवार को भोपाल में उच्चस्तरीय बैठकें कर भोपाल- इंदौर रोड का जायजा लेगी। टीम में वर्ल्ड बैंक की कंट्री डायरेक्टर ओन्नी रूही, लीड अर्बन स्पेशलिस्ट बरजोर मेहता सीनियर अर्बन प्लानर अभिजीत रे शामिल हैं।
दौरे के बाद पांच मार्च को मुख्य सचिव अंटोनी डिसा से मुलाकात कर प्रोजेक्ट की संभावनाओं पर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। इसके बाद प्रोजेक्ट की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट बनाने का काम शुरू होगा। इसमें ही तय होगा कि इसकी लागत कितनी होगी और कितने वक्त में यह प्रोजेक्ट बनकर तैयार होगा।
फोरलेन बनेगा सिक्स से एट लेन
कॉरिडोर के लिए जमीन का अधिग्रहण करने की बजाए आपसी करार किया जाएगा। इसमें मौजूद फोरलेन रोड को छह से आठ लेन में बदला जाएगा। स्मार्ट सिटी वाली जमीनों पर नए शहर की बसाहट होगी।
यह भी फायदा
कॉरिडोर के आसपास रहने वाली एक करोड़ की आबादी पर इसका असर होगा।
20 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे।
30 हजार एकड़ जमीन का विकास, तीन लाख करोड़ का निवेश होगा।
हाईस्पीड ट्रेन
सीहोर से देवास के बीच नया ट्रैक बिछाकर भोपाल-इंदौर के बीच हाईस्पीड ट्रेन चलाने की भी योजना है। भोपाल से इंदौर का सफर महज दो से ढाई घंटे में तय हो सकेगा।
कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर
देश के केंद्र में होने से यहां की लोकेशन इंडस्ट्री के लिहाज से मुफीद है। यहां लॉजिस्टिक हब और मैन्यूफैक्चरिंग हब बनने पर परिवहन लागत कम होगी। प्रदेश के दो बड़े शहरों के बीच कॉरिडोर होने से कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर है।
वर्ल्ड बैंक से लोन लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का काम प्रदेश सरकार करेगी। इसके लिए बीआईईएससीओ का गठन किया जाएगा, जो कि निजी कंपनी के सहयोग से योजना पूरी करेगी।

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