रिपोर्ट में खुलासा: ‘लाडली’ का कमाल! बेटों से ज्यादा बेटियों का जन्म

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इंदौर. जिले में बेटों की तुलना में बेटियों के जन्म की संख्या बढ़ रही है। प्रशासन द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से जुटाई गई जानकारी में यह बात सामने आई है। विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक तीन महीने में एक हजार लड़कों पर लड़कियों के जन्म का अनुपात 1100 से ऊपर रहा। इसकी वजह ‘लाडली’ को माना जा रहा है। सोनोग्राफी सेंटर पर प्रशासन एक डिवाइस के माध्यम से नजर रख रहा है जिसे ‘लाडली’ नाम दिया गया है। जिले की 17 लाख की आबादी को कवर करते हुए लड़के-लड़कियों के जन्म की यह जानकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने जुटाई है। इसकी तुलना गत वर्ष के सालाना हेल्थ सर्वे से की गई। 2014 का सर्वे आना बाकी है लेकिन प्रशासन को उम्मीद जागी है कि जिले के लिंगानुपात की स्थिति में और सुधार आएगा। पीसीपीएनडी सेल प्रभारी सतीश जोशी बताते हैं कि ट्रैकर लगने से फर्क आया है।
हम नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग से भी बच्चों के जन्म के आंकड़े जुटा रहे हैं। एमपी वॉलेटंरी हेल्थ एसोसिएशन के मुकेश सिन्हा कहते हैं कि लिंगानुपात में गिरावट का अंतर नहीं बढ़ना पॉजीटिव ट्रैंड है। सख्ती के चलते लिंग परीक्षण जैसी गतिविधियां कम हुई है। गर्भवती महिलाओं के आवेदनों की संख्या बढ़ी है। उधर, स्वास्थ्य विभाग के पास बच्चों के जन्म को लेकर संपूर्ण आंकड़े उपलब्ध ही नहीं है।
ट्रैकर से ये असर भी हुआ
> सोनोग्राफी मशीन में ट्रैकर लगने के बाद सोनोग्राफी के लिए जरूरी फॉर्म एफ की संख्या दो गुना हुई। इस बार 21 हजार फॉर्म ऑनलाइन जमा हुए।
> सालाना हैल्थ सर्वे के अनुसार इंदौर में जन्म के समय लिंगानुपात स्थिर हुआ है। वर्ष 2012 में 871 और 2013 में भी यह 871 ही था।
> एमटीपी के रजिस्ट्रेशन की संख्या चार गुना बढ़ी है।
ऑनलाइन हो रही है मॉनीटरिंग
प्रशासन ने जिले की सोनोग्राफी मशीनों में ट्रैकर लगवाया है जिसे कलेक्टोरेट स्थित सर्वर से जोड़ा गया है। जैसे ही कोई सोनोलॉजिस्ट मशीन को ऑन करेगा, तुरंत सर्वर पर लगी लाइट जल जाएगी। इससे यह पता लगाने में आसानी हुई कि डॉक्टर दिनभर में कितनी बार सोनोग्राफी की गई। इसकी ऑटोमेटिक रिकार्डिंग भी होती है जिसे कभी भी प्रशासन जांच सकता है। इससे न केवल सोनोग्राफी फॉर्म की संख्या बढ़ी है बल्कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (गर्भपात) के चार गुना केस रजिस्टर्ड होने लगे हैं।

ये अच्छा संकेत है
दो साल से लिंगानुपात में गिरावट का स्तर स्थिर हुआ है। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से बच्चों के जन्म के आंकड़े जुटाए गए जो सकारात्मक बदलाव का संकेत हैं।
-आकाश त्रिपाठी, कलेक्टर

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