50 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार

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इंदौर. आईआईएम के सामने ग्राम रंगवासा में डायमंड जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क बनने की राह खुल गई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय संवर्धन समिति से इसे मंजूरी मिल गई है। इस पार्क से कम से कम 50 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
यह 254 एकड़ में 165 करोड़ की लागत से बनेगा। सेंट्रल इंडिया में यह अब तक का सबसे बडा़ डायमंड पार्क होगा। 10 साल से अटके इस प्रोजेक्ट को संभवत: मंगलवार को कैबिनेट में रखा जाएगा। यहां से मंजूरी मिलते ही टेंडर जारी हो जाएंगे। प्रोजेक्ट के अनुसार 4 साल में यहां निर्माण पूरा हो जाएगा।

एकेवीएन (औद्योगिक केंद्रीय विकास निगम), इंदौर के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर लंबे समय से कानूनी अड़चनें रही हैं। अब अधिकांश जमीन पर विवाद खत्म हो गए हैं। एकेवीएन ने प्रोजेक्ट की डीपीआर बना ली है और इसके टेंडर की भी तैयारी कर ली है। कैबिनेट से पास होते ही टेंडर जारी हो जाएंगे। यह पार्क पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के आधार पर बनाया जाएगा।
सेज और घरेलू कारखाने दो हिस्सों में बनेंगे
पार्क के दो हिस्से होंगे। एक सेज एरिया में होगा। इसमें 134 एकड़ जमीन होगी। यहां बड़ी कंपनियों के प्रोजेक्ट होंगे जो केवल निर्यात के लिए कच्चे हीरों को तराशने का काम करेंगे। वहीं 120 एकड़ का दूसरा हिस्सा डीटीए (डोमेस्टिक टैरिफ एरिया) होगा, जिसमें घरेलू कारखाने होंगे।

क्या-क्या है पार्क में
सेज में- 44.52 एकड़ जमीन में 95 बड़े औद्योगिक प्लॉट होंगे।
– 53.33 एकड़ में नॉन कोर एरिया होगा, जिसमें 15 हजार लोगों के आवास,
– 500 बेड का अस्पताल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, स्कूल, हेलिपैड बनेंगे।
– 36.47 एकड़ में रोड, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट व अन्य निर्माण होंगे।

डीटीए में-
– 73.12 एकड़ में 36 औद्योगिक प्लॉट।
– 46.90 एकड़ में पार्किंग, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट, रोड।
व अन्य निर्माण होंगे।
कई बड़ी कंपनियां लगाएंगी प्रोजेक्ट
शासन और एकेवीएन द्वारा देश की दस बड़ी कंपनियों से इस प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा हो चुकी है। 150 मध्यम व लघु कंपनियां भी इस प्रोजेक्ट को लेकर मंशा जता चुकी हैं। वहीं जेम्स एंड ज्वेलरी व डायमंड क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख कंपनी टाटा, रोसी ब्लू, टाइटन, राजेश एक्सपोर्ट, गीतांजलि, श्रीगणेश ज्वेलरी से भी इस संबंध में एकेवीएन की चर्चा हो चुकी है।
यहां ये काम होगा
– ब्रांडेंड ज्वेलरी की ग्लोबल मार्केटिंग। बड़ी कंपनियों के दफ्तर खुलेंगे।
– हीरों की कटिंग, पॉलीशिंग, डिजाइनिंग।
– कच्चे हीरों की पॉलिशिंग कर निर्यात किया जाएगा।
यह होगी प्लॉट की कीमत
व्यावसायिक- 1000 रुपए वर्गफीट।
औद्योगिक-350 रुपए प्रति वर्गफीट।
आवासीय-500 रुपए प्रति वर्गफीट।
सामाजिक उपयोग (स्कूल, अस्पताल)- 560 रुपए प्रति वर्गफीट

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