शार्ट टर्म एनालिसिस से लगाया जा सकेगा भूकंप का पूर्वानुमान

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Short term analysis for pre earthquake

Short term analysis for pre earthquake

नेपाल में शनिवार को आई त्रासदी के बाद भू-भौतिकविद भूकंप के पूर्वानुमान के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निग सिस्टम) को मजबूत बनाने की तैयारी की जा रही है। शार्ट टर्म एनालिसिस के जरिए वैज्ञानिक प्रणाली विकसित कर रहे हैं।
भोपाल के आइसेक्ट विश्र्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर भू-भौतिकविद् डॉ. सूर्याशु चौधरी का कहना है कि हिमालय का पूरा इलाका वीक जोन (भूकंप की ज्यादा आशंका वाला) में आता है। इसके साथ ही उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, असोम, गुजरात, जबलपुर, लातूर (महाराष्ट्र) तथा कश्मीर भी वीक जोन में शामिल है। इनके लिए दीर्घकालिक अनुसंधान के साथ ही लघुकालिक (शार्ट टर्म) अनुसंधान ज्यादा जरूरी हैं। ताकि समय रहते लोगों को भूकंप के खतरे से सतर्क किया जा सके।
डॉ. चौधरी ने बताया कि भूकंप से पूर्व भूगर्भ में चलने वाली उथल-पुथल से पैदा होने वाली गैसें पृथ्वी की सतह के तापमान, वायुमंडल और आइनोस्फीयर की परतों में बदलाव आता है। आइनोस्फीयर वायुमंडलीय परत है, जो जमीन की सतह से 90 किलोमीटर ऊंचाई से शुरू होकर 450 किलोमीटर तक जाती है। आइनोस्फीयर में कण के घनत्व और तापमान का अध्ययन किया जाता है। आकाश में होने वाली इस हलचल के समय रहते अध्ययन से भू-भौतिकविद् बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं। डॉ. सूर्याशु चौधरी के मुताबिक भूकंप के पूर्वानुमान वाले क्षेत्र के लोगों को समय रहते इसकी जानकारी देकर जानमाल नुकसान को बचा सकते हैं। भू-भौतिकविद् लघुकालिक अध्ययन की इस प्रणाली को और विकसित करने में लगे हैं।

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