सिगरेट पीने से हुई दादा की मौत, पोती ने छुड़ा दी 267 लोगों की Smoking

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विष्णुपुरी एनएक्स वासुदेव प्लाजा की रहने वाली 11 साल की बच्ची दिशा। अभी कक्षा पांचवीं में पढ़ती है। पिछले छह साल से धूम्रपान के खिलाफ मुहिम छेड़े है। अपने दादा की मौत के बाद से सिगरेट से नफरत करती है। अब तक ढाई हजार लोगों के हाथ से सिगरेट छीनकर उन्हें नशा छोड़ने की नई दिशा दिखा चुकी है। बच्ची के इस प्रयास का असर भी हुआ। 267 लोग धूम्रपान से हमेशा के लिए तौबा कर चुके हैं। दिशा का लक्ष्य शहर को धूम्रपान से मुक्त बनाना है।
दिशा के पिता अश्विन तिवारी और मां संगीता बताते हैं छह साल पहले जब वे होटल में खाना खा रहे थे तभी वहां सिगरेट पी रहे एक व्यक्ति के हाथ से दिशा ने सिगरेट छीनकर फेंक दी थी। ऐसा करने पर उन्होंने उसे डांटा, लेकिन वह नहीं मानी। अपनी आदत को जारी रखते हुए वह लगातार सिगरेट पीने वालों के हाथों से सिगरेट छीनने लगी। उसकी ये मुहिम लोगों पर असर करने लगी। अब वे भी दिशा की इस मुहिम में साथ दे रहे हैं। अंकल सिगरेट छोड़ दो ना प्लीज….

ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाली दिशा बताती हैं कि मेरे दादा ओमप्रकाश तिवारी मुझे सबसे ज्यादा प्यार करते थे, लेकिन जब उनकी मौत हुई तो मैंने मां से पूछा दादाजी अच्छे इंसान थे वह क्यों चले गए। तो मां ने कहा बेटा सिगरेट पीने से उनकी तबीयत बिगड़ी और वे हमसे दूर हो गए। बस मां की ये छोटी सी बात दिशा के दिल में घर कर गई और उसने तब से यह कदम उठाया।

दिशा बताती है कुछ लोगों से जब वह सिगरेट छीनती है तो कुछ नाराज होते हैं तो कुछ थोड़ी देर के लिए चौंक जाते हैं फिर उसे शाबासी देकर ध्रूमपान छोड़ने का बोलते हैं, जो यह वादा करते हैं वह डायरी में उनके नाम और नंबर लिखवा लेती है। फिर डायरी में लिखे नंबरों से उन्हें फोन और मैसेज कर फीडबैक भी लेती है और सतर्क करती है। अब तक ढाई हजार लोग दिशा की डायरी में हस्ताक्षर कर सिगरेट छोड़ने की बात लिख चुके हैं।

दिशा के कहने पर इन्होंने छोड़ा सिगरेट पीना

केस 1- आईटी कंपनी में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर 27 वर्षीय सर्वेश चौरे बताते हैं दिशा से पहली मुलाकात सालभर पहले हुई थी। एक होटल के बाहर मैं स्मोकिंग कर रहा था, तभी उसने अचानक मेरे हाथ से सिगरेट छीन ली। पहले मैं उसे देख चौंक गया, लेकिन जब उसने मासूमियत से कहा मेरे दादाजी की मौत इसी से हुई है, प्लीज… इसे मत पियो तो उसकी बात दिल में घर कर गई। तभी से मैंने सिगरेट छोड़ दी है।

केस 2 – ऑर्गेनिक खाद बनाने वाली कंपनी में कार्यरत 28 साल के अवनेश सिंह बताते हैं डेढ़ साल पहले दिशा से उनकी पहली मुलाकात हुई थी। वे सपना-संगीता सिनेमा के पास सड़क किनारे गाड़ी खड़ी कर सिगरेट पी रहे थे, तभी दिशा दौड़ते हुए पास आई और हाथ से सिगरेट छीन ली। मैंने उसे गुस्से से देखा तो वह मासूमियत से बोली मेरे दादा दी इसे पीने से मर गए हैं। आप मत पियो वरना आप भी मर जाओगे। उसकी बात से में प्रभावित हुआ और कुछ बोल नहीं सका। बाद में ठाना और सिगरेट हमेशा के लिए छोड़ दी। मैं दिशा के साथ तंबाखू के खिलाफ तीन रैलियों में भी शामिल हुआ हूं।

केस 3 – 40 वर्षीय मेस संचालक और प्रॉपर्टी व्यवसायी कृष्ण कुमार बताते हैं दिशा मेरे फ्लैट के ऊपर वाले फ्लैट में ही रहती है। एक बार में फ्लैट के बाहर सिगरेट पी रहा था, तभी वो पास आई और मुझे कहा अंकल ये सिगरेट पीने से मेरे दादा जी की मौत हुई है, प्लीज अंकल आप इसे मत पीयो। उसकी बात से न जाने क्या प्रेरणा मिली की मैंने इसे छोड़ने का निर्णय लिया और आज अच्छा महसूस भी कर रहा हूं। पत्नी भी विश्वास नहीं कर पाती थी कि मैं इस लत को छोड़ सकता हूं।

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