स्टूडेंट्स को डिजिटल मार्कशीट देगा CBSE

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सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) स्टूडेंट्स को उनके सर्टिफिकेट और मार्क्सशीट की कॉपियां डिजिटल फॉर्मेट में देगा। डिजिटल फॉर्मेट में स्टूडेंट्स को सर्टिफिकेट सामान्य सर्टिफिकेट के साथ ही दिए जाएंगे। सूचना प्रौद्योगिकी सचिव आर एस शर्मा ने बताया, ”डिजिटल सर्टिफिकेट के मामले में हम सीबीएसई के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस प्रस्ताव का मकसद स्टूडेंट्स को अपने सर्टिफिकेट डिजिटल लॉकरों में सुरक्षित रखने में मदद करना है। मुझे उम्मीद है कि सीबीएसई अगले कुछ महीनों के अंदर इस प्रकार के सर्टिफिकेट जारी करना शुरू कर देगी।” बता दें कि केंद्र सरकार ने दस फरवरी को डिजिटल लॉकर्स की शुरुआत की थी और तीन महीने के भीतर ही एक लाख से अधिक लोगों ने इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया।

क्या है डिजिटल लॉकर
डिजिटल लॉकर में सारे दस्तावेजों को संभालकर रखा जा सकता है। यह एक तरह से ऑनलाइन रिपॉजिटरी है। डिजिटल लॉकर का प्रस्ताव नवंबर 2014 में रखा गया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि यह लॉकर लोगों के आधार कार्ड से जुड़ा रहेगा। साथ ही, इसमें वे अपने समस्त अहम दस्तावेज रख सकेंगे। इन दस्तावेजों में जैसे जन्म प्रमाण-पत्र और डिग्री आदि रखी जा सकती है। अब इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने इसका आधुनिक संस्करण पेश किया है। यह प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम डिजिटल इंडिया का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है।
कौन खोल सकता है डिजिटल लॉकर्स
आधार नंबर रखने वाला कोई भी व्यक्ति बिना किसी शुल्क के अपना डिजिटल लॉकर खोल सकता है। शर्मा ने बताया, ”एकेडिक सर्टिफिकेट के साथ ही हम अन्य सरकारी विभागों से संपर्क कर रहे हैं, जो किसी भी प्रकार के सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में शामिल हैं।” मध्य प्रदेश में 24 हजार से अधिक, उत्तर प्रदेश में 17 हजार से अधिक और गुजरात में 13 हजार से अधिक लोग इस सुविधा के लिए पंजीकरण करवा चुके हैं और ये तीनों राज्य ऐसा करने वाले राज्यों में टॉप पर हैं।
कैसे करें इसका उपयोग
डिजिटल लॉकर स्कीम का मकसद सभी शैक्षणिक, मेडिकल, पासपोर्ट और पैन कार्ड की जानकारी को एक जगह रखना है। यह इतना सुविधाजनक होगा कि आप दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर इसका उपयोग कर सकेंगे, क्योंकि यह क्लाउड स्टोरेज से जुड़ा रहेगा। इसे अपना लेने के बाद किसी भी व्यक्ति को अपने दस्तावेजों को साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी, न उनकी साज-संभाल की चिंता रहेगी। इसके अलावा, विदेशों में कई बार नौकरी देने वाली कंपनियां आपका पासपोर्ट रख लेती हैं, इससे इस परेशानी का भी हल हो सकेगा। इसमें संरक्षित की गई जानकारी को एक पासवर्ड से सुरक्षित रखा जा सकेगा।
कैसे काम करेगा
डिजिटल लॉकर को साइन करने के लिए पहले आपको आधार नंबर और जिस मोबाइल नंबर से वह आधार नंबर जुड़ा है, वह देना होगा। यूज़र को टेक्स्ट बॉक्स में लिखा मिलेगा, प्लीज एंटर यूआईडी तब आधार नंबर (यूआईडी) टाइप करना होगा। यूआईडी नबंर डालकर इसमें दिया कोड नंबर भी देना होगा। साइन इन बटन पर क्लिक करने पर ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) यूआईडीएआई द्वारा यूज़र के मोबाइल नबंर पर आएगा। ध्यान रखें कि यह ओटीपी 30 मिनट तक के लिए ही वैध रहेगा। अगर आप पासवर्ड गलत डालते हैं तो आपको एक और मौका दिया जाएगा। आप पासवर्ड डालने के बाद वैलिड ओटीपी टैब पर क्लिक करेंगे। जैसे ही यह वैलिडेट हो जाए, समझ जाइए कि आपका साइन-अप व लॉग-इन प्रॉसेस पूरा हो चुका है।
ऐसे एक्सेस कर सकेंगे
यदि यूज़र ने ई-मेल आईडी वहां दर्ज करा रखी हो साथ ही यह ई-मेल ऐड्रेस पर भी आएगा। इसमें ओटीपी डालकर ‘वैलिडेट ओटीपी’ बटन पर क्लिक करना होगा। एक बार ओटीपी साइन अप में सही हो जाता है तो लॉग-इन पूरा हो जाता है। आप आसानी से इसे एक्सेस कर सकेंगे। इसके बाद डैशबोर्ड सामने आ जाएगा, इसमें आपको डॉक्युमेंट्स की सूची चुननी होगी, जैसे पैन, वोटर आईडी या माय प्रोफाइल, माय सर्टिफिकेट जैसे सेक्शन में जाना होगा। यहां इसमें दो सेक्शन होंगे। इसमें जो जानकारी आपने ही फीड की है, वह किसी को भी ई-मेल से आप भेज सकेंगे।
सेल्फ अटेस्ट दस्तावेज रखें
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने वर्तमान में इसके लिए 10 एमबी की स्पेस दी है। इसके 1 जीबी तक बढ़ जाने की संभावना है। स्टोरेज स्पेस नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर के क्लाउड पर उपलब्ध रहेगी। इसका सॉफ्टवेयर सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्प्यूटिंग (सी-डेक) द्वारा विकसित किया गया है। अपने दस्तावेजों को डिजिटल सिग्नेचर के साथ सेल्फ अटेस्ट कर इसमें रखना ज्यादा फायदेमंद रहता है। आपके ई-हस्ताक्षर के पश्चात इसमें किसी गड़बड़ी की आशंका नहीं रह जाती है। डिजिटल लॉकर का आधुनिक संस्करण www.digitallocker.gov.in पर उपलब्ध है। एक बार डिजिटल लॉकर के लिए साइन कर लेने पर डिजिटल लॉकर आधार के डाटाबेस से सारी जानकारी ले लेता है।
दो सेक्शन
डिजिटल लॉकर में माय प्रोफाइल व माय सर्टिफिकेट नाम के दो अनुभाग हैं। आप अपने दस्तावेज डाउन लिस्ट के माध्यम से अपलोड कर सकते हैं। आप पहले सिलेक्ट करें कि आपको कौन से दस्तावेज अपलोड करने हैं। इसके बाद आप जो डिटेल जरूरी हो उसे भरें। यूज़र किसी भी पीडीएफ, जेपीईजी, पीएनजी, बीएमपी या जिफ में अपने डॉक्युमेंट्स इसमें रख सकता है। सारा डाटा पासवर्ड से ही सुरक्षित रहेगा। जब भी यूज़र इसके लिए लॉग-इन करना चाहेगा, एसएमएस के जरिये पासवर्ड यूज़र के मोबाइल पर भेजा जाएगा।
कौन देख रहा है, पता चलेगा
इसके अलावा, आपका डिजिलॉकर उन सब एजेंसियों के नाम भी बताएगा जो डिजिटल सिग्नेचर जारी करती हैं। साथ ही, उनका भी नाम बताएगा जिन्होंने आपके डिजिटल डॉक्युमेंटस देखे हैं। आप इन ई-दस्तावेजों को एक्सएमएल फॉर्मेट में डिजिटल लॉकर भंडार में अपलोड कर सकते हैं। इसके अलावा, आप ई-साइन की सुविधा का भी उपयोग कर पाएंगे।

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