जड़ों से जुड़ाव

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इंडियन फैशन की दुनिया में वेस्टर्न प्रभाव के बावजूद, अभी भी कुछ ऐसे डिज़ाइनर्स हैं जिन्होंने अपनी जड़ों से जुड़े होते हुए भी अलग पहचान बनाए रखी है. आज के प्रतियोगी दौर को देखते हुए, जिसमें वो रहते और काम करते हैं, ये समझना बेहद ज़रूरी है कि वो कैसे अपनी कला के साथ इंसाफ करते हुए मार्केट की कमर्शिल जरूरतों को पूरा करते हैं? किस तरह का डिज़ाइनरवेयर बिकता है और समय के हिसाब से सही भी होता है? आप बहस के किसी भी तरफ क्यों ना हों, ऐसे कुछ डिज़ाइनर्स हैं जो अपनी कला की तरफ पूरी तरह से सच्चे रहे हैं और लगभग खत्म हो चुकी बुनाई, रंगाई और प्रिंटिंग की तक्नीकों को दोबारा से ज़िंदा किया है और साथ ही आज के समय को और खरीददारों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए इन्हें कंटेंपररी टच दिया है.
Gaurang – पिछले कुछ सालों में हैदराबाद डिज़ाइनर ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है. इंडियन वीव्स और हैंडलूम्स के लिए इनका प्यार और लगाव किसी से भी छुपा नहीं है. फिर चाहे वो पटोला वीव्स से इंस्पायर्ड कलेक्शन हो या इनकी खूबसूरत बनारसी साड़ियां. इंडिया और मेक इन इंडिया को मशहूर करने के लिए इनका प्रयास काबिल-ए-तारीफ है. इनका हर कलेक्शन इंडियन बुनकरों और कारीगरों को एक शानदार ट्रिब्यूट है. Gaurang, जिन्होंने पहले ही चंदेरी, फुलकारी और बाघ के साथ काम किया है ने इस बार भी अपने कलेक्शन में ग्लैमर को इंडियन एलिगेंस के साथ मिलाकर पेश किया है. इनके काम की खूबसूरती इनकी खूबसूरत म्यूज़ेज़ पर देखते ही बनती है.
Sanjay Garg of Raw Mango – Sanjay अपने काम के लिए इंस्पिरेशन इंडिया के रिच कल्चरल पास्ट और पुरानी यादों स लेते हैं. इनकी खूबसूरत क्रिएशन्स हमें उन खूबसूरत दिनों की याद दिलाते हैं जहां फैशन का एक मात्र काम होता था औरतों को खूबसूरत महसूस कराना. इनका लेबल ‘Raw Mango’ एक कंटेम्पररी इंडियन लेबल है जो इंडियन हैंडलूम्स के साथ काम एक्सपेरिमेंट करता है और हैंडवोवेन टेक्सटाइल्स के साथ काम करता है. इनकी हैंडवोवेन साड़ीयों ने बहुत जल्द ही काफी य़शोहरत हासिल कर ली. बारीक बुनाई को सिंपल, कंटेम्पररी और सोफिस्टिकेटेड टच देते हुए, Sanjay ने हैंडलूम्स पर काफी रीसर्च की है अपने ऐस्थेटिक्स को डिफाइन करने के लिए जो ट्रेडिशन और मॉडर्निटी को साथ-साथ लेकर चलता है
Sabyasachi Mukherjee – अगर हम इंडियन बुनाई और हैंडलूम्स के रिवाइवल को एक कॉज़ माना जाए तो ये कोलकाता-बेस्ड couturier हैं सबसे आगे. Sabyasachi, जिन्होंने इंडियन विंटेज को कंटेम्पररी टच देने की कला में महारथ हासिल की है, ने समय-समय पर बनारसी ब्रोकेड, कांजिवरम, हैदराबाद के सलमा-सितारा और लखनऊ के चिकन-वर्क के साथ काम किया है. जो चीज़ इन्हें बाकियों से अलग करत है वो है इंडियन क्राफ्ट्स में इनका अटूट विश्वास और इंडियन हैंडलूम्स को एक नयापन देने की कला.
Ritu Kumar – पद्मश्री Ritu Kumar को इंडियन हैंडलूम्स का मोल पता है. ये दशकों से कच्छ, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश और कोलकाता के कई बुनकरों के साथ काम करती रही हैं. F101 की टॉप पैनलिस्ट्स में से एक Ritu Kumar हमें बताती हैं, “हमारी कंपनी की कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सबिलिटी के तहत, हमने The Revivalist Programme की शुरुआत की है, जिसके तहत मेरी टीम सभी मुख्य हैंडलूम हॉटस्पॉट्स का दौरा करके ये देखती है कि अगर हम किसी विशेष कला के साथ काम कर सकें. हम पहले बनारस और उड़ीसा का दौरा कर चुके हैं और अब हम मध्य प्रदेश में खादी के साथ काम करने की प्नैलिंग कर रहे हैं.” हैंडलूम्स को नया जीवन देने के लिए और इन्हें कंटेम्पररी डिज़ाइन्स में इस्तेमाल करने के लिए उन्हें फ्रेंच सरकार की तरफ से “Chevalier des Arts et des Lettres (Knight of the Order of Arts and Letters) सम्मानित किया जा चुका है. फिर चाहे वो मंगलपुरी कॉटन वीव्स हों या बीचवर्क, राजस्थान की लहरिया या बांधनी हो, कच्छ का टाई-एंड-डाई या तमिल नाडू की कांजिवरम सिल्क, लगभग हर तरह की इंडियन वीव्स का इस्तेमाल आप उनकी डिज़ाइन्स में देख सकते हैं.
Anju Modi – Couturier Anju Modi के काम में इंडिया के तरह-तरह के टेक्सटाइल ट्रेडिशन्स का इस्तेमाल दिखता है. देश की अनेकता की झलक उनके काम में दिखती है और ये उनके काम के एक अहम और अटूट हिस्सा है. पिछले कुछ दशकों में इन्होंने कुछ रीसर्च इनिशिएटिव्स शुरू किए हैं इंडियन टेक्सटाइल्स और बुनाई के तरीकों को समझने और इन्हें सुधारने की और साथ ही इन्होंने कारीगरों और बुनकरों को बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए. वेजिटेबल रंगाई, ब्लॉक प्रिंटिंग और ज़री और ज़रदोज़ी जैसी पारंपरिक कढ़ाई को अपने कंटेंपररी डिज़ाइन्स में इस्तेमाल किया है. इन्हें चंदेरी बुनाई और बांधनी प्रिंटिंग जैसे ट्रेडिशनल क्राफ्ट्स में भी महारथ हासिल है.

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