महापौर ने मोबाइल दिया बच्चे ने बिना देखे मैसेज पढ़ा

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बालक-बालिकाओं में नैसर्गिक रूप से बुद्धि होती है। किंतु समुचित शिक्षण पद्धति के अभाव में उनके गुणों का विकास और विस्तार नहीं हो पाता। यही कारण है आजादी के 67 साल बाद भी देश में अंग्रेजों की मैकाले शिक्षा पद्धति लागू है। सुपर सेंसर थेरेपी मलेशिया और जापान जैसे देशों में बाल्यकाल से ही दी जाती है। बुरहानपुर में भी नौनिहाल प्रतियोगी परीक्षाओं में बाजी मार सकेंगे।

गुजरात से आए डॉ. सतीश ने बुधवार को शनवारा स्थित गुजराती मोढ़ समाज वाड़ी में यह बात कही। यहां उन्होंने बच्चों की आंखों पर पट्‌टी बांध कर छठी इंद्री के उपयोग की जानकारी दी। अनिता देवकर ने शहर के बच्चों के लिए यहां सुपर सेंसर थेरेपी के तहत निशुल्क डेमाे रखा था। महापौर अनिल भोसले ने गुजरात से आए बालक परम की आंखों पर पट्‌टी बांधी। परम ने बिना देखे ही मोबाइल पर लिखा मैसेज पढ़ा। प्रशिक्षक डॉ. सतीश ने विद्यार्थियों और पालकों को ऐसे अन्य कई गुर सिखाए। महापौर अनिल भोसले ने इस थेरेपी को सराहा। इस मौके पर खंडवा की माइंड स्पेस एकेडमी संचालक इमरोज हकीम और शहरोज कुरैशी ने सुपर सेंसर थेरेपी की जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गुजराती मोढ़ वणिक समाज अध्यक्ष सुरेश चौधरी ने भी शहर के बच्चों के लिए इस थेरेपी को बेहतरीन बताया। कार्यक्रम में शहर के 500 विद्यार्थी और 200 पालक मौजूद थे। संचालन गोपाल देवकर ने किया। अाभार अनिता गोपाल देवकर ने माना।

महापौर अनिल भोसले ने गुजरात के परम को मोबाइल दिया। उसने बिना देखे मैसेज पढ़कर दिखाया।

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