योग को मिलेगा स्‍पोर्ट्स का दर्जा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग यानी डीओपीटी ने खेल मंत्रालय को निर्देश दिए हैं कि योग को एक खेल के रूप में मान्यता देने पर विचार किया जाए। संभव है कि आने वाले दिनों में कबड्डी की तर्ज पर योग को भी राष्ट्रीय खेलों में जगह मिल जाए। अगर ऐसा होता है सदियों पुरानी इस कला से लाखों लोगों को प्रशिक्षकों के तौर पर रोजगार मिल सकेगा।

21 जून को राजपथ पर मोदी समेत 45 हजार लोग करेंगे योग
21 जून को इंटरनेशनल योगा डे पर प्रधानमंत्री मोदी समेत करीब 45 हजार लोग दिल्ली के राजपथ पर योग करेंगे। यूएन ने 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया है। डीओपीटी के निर्देश पर ही योगा फेडरेशन को खेल मंत्रालय से मान्यता मिल चुकी है। भविष्य में अलग-अलग आयु वर्ग में योग प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकती हैं। इंटर स्टेट, जोनल और नेशनल लेवल के गेम्स में योग प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकती हैं। 1990 के बीजिंग एशियाई खेलों में कबड्डी को शामिल किया गया था और अब विश्व स्तर पर इसे मान्यता मिलने लगी है। अब ये माना जा रहा है कि अगर योग को भी खेल का दर्जा मिल जाता है तो हो सकता है इसे विश्व स्तर पर यही सम्मान मिल जाए। योग वैसे तो लंबे समय से स्कूल और यूनिवर्सिटीज में कोर्स के रूप में शामिल रहा है।
आयुष विभाग भी सक्रिय
डीओपीटी के निर्देश के बाद आयुष और खेल मंत्रालय तेजी से कार्रवाई कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक खेल मंत्रालय योग को खेल घोषित करने से पहले केवल आयुष मंत्रालय की हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहा है। जानकारों का कहना है कि योग को अगर खेल घोषित किया जाता है तो इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। देश भर में इसके जितने प्रशिक्षक हैं उनके लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। 21 जून को विश्व योग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कई सेलेब्रिटीज भी शिरकत करेंगे। देश भर के करीब 11 लाख एनसीसी कैडेट्स और सेना के पांच हजार जवान भी योग कार्यक्रम में शामिल होंगे।
इधर, गोरखपुर से बीजेपी के सांसद महंत आदित्यनाथ ने योग-सूर्य नमस्कार का विरोध करने वालों को डूब मरने को कहा है। वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर में एक कार्यक्रम के दौरान आदित्यनाथ ने कहा,” जो लोग सूर्य नमस्कार को नहीं मानते, उन्हें समुद्र में डूब मरना चाहिए या अंधेरे कमरे में जिंदगी बितानी चाहिए। जो लोग योग का विरोध करते हैं, उन्हें भारत की धरती छोड़ देनी चाहिए।”

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