स्मार्ट सिटी बनने से बहुत दूर है इंदौर, बाकी हैं काफी काम

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इंदौर. स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता के लिए नगर निगम ने अपनी और से नंबर भेज दिए हैं। निगम ने दावा किया है कि सिटी प्रोजेक्ट को लेकर जो बिंदु तय हैं, उनमें इंदौर प्रदेश में अव्वल है। बावजूद इसके अभी काफी काम बाकी है।
महापौर मालिनी गौड़ के निर्देश पर निगमायुक्त मनीष सिंह ने प्लान बनाया है। इसके मुताबिक महापौर, निगमायुक्त, एमआईसी सदस्य, क्षेत्रीय पार्षद स्मार्ट सिटी को लेकर निगम के सभी 19 जोनल कार्यालयों पर बैठकें करेंगे। इसमें प्रबुद्ध नागरिकों को भी बुलाया जाएगा। उन्हें स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन और फायदा बताया जाएगा। इस काम में उनसे सहयोग भी मांगा जाएगा। निगम अपने स्तर पर भी ई-गवर्नेंस को बढ़ाने और पानी, शौचालय, हरियाली के लिए काम करेगा। इसी महीने से निगम के पोर्टल पर ई-न्यूज लेटर भी डाला जाएगा।
स्मार्ट सिटी बनने की राह पर चल रहे इंदौर शहर के सामने काफी चुनौतियां हैं। स्मार्ट सिटी में उल्लेखित सीवरेज व बारिश के पानी की निकासी और गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर उपयोग करने की बात करें, तो आधे से ज्यादा शहर में 150 साल पुरानी होलकर कालीन सीवरेज लाइन बिछी है। इसे बदलने के लिए ही लगभग 450 करोड़ रुपए चाहिए। गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर उपयोग तो तब होगा, जब गंदे नालों को कान्ह नदी में मिलने से रोका जाएगा और इसका शुद्धीकरण किया जाएगा। शहर के बीच से गुजरने वाला बीआरटीएस और जवाहर मार्ग, एमजी रोड़ जैसी व्यस्त सड़कों पर ट्राफिक को सुचारु रखना दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है।

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