BU में बड़ी लापरवाही,PhD के अपात्रों को बताया पात्र

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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) में पीएचडी मामले में बड़ी लापरवाही सामने आई है। विवि ने ऐसे उम्मीदवारों को भी पीएचडी अवार्ड के लिए पात्र मान लिया, जिन्होंने अभी शोधकार्य ही पूरा नहीं किया है।
कई उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन्होंने हाल ही में शोधकार्य शुरू किया है। इन्हें सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं, जिसमें लिखा गया है कि संबंधित उम्मीदवार ने� यूजीसी के पीएचडी रेगूलेशन-2009 के तहत क्राइटेरिया पूरा कर लिया है। इनकी संख्या 2000 है।
बीयू ने पीएचडी रेगुलेशन-2009 वर्ष 2013 में लागू किया। इसके तहत तीन स्तर के उम्मीदवारों को कोर्स वर्क� कराया गया। पहले उम्मीदवार वो थे, जिनको पीएचडी अवार्ड हो चुकी थी। दूसरे ऐसे थे, रजिस्ट्रेशन के बाद जिनका शोधकार्य शुरू हो चुका था। तीसरे उम्मीदवार ऐसे थे, जिन्होंने प्रवेश परीक्षा को पास ही किया था। ये ऐसे उम्मीदवार हैं जिनका रजिस्ट्रेशन तक नहीं हुआ है, लेकिन विवि ने सभी को समान प्रमाण-पत्र बांट दिए।
प्रमाण-पत्र में सिर्फ कोर्स वर्क� पास करने का उल्लेख किया जाना था, लेकिन विवि ने पीएचडी कर चुके उम्मीदवारों के अलावा रजिस्टे्रशन कराने वाले और पहले से रजिस्टर्ड उम्मीदवारों को भी पीएचडी अवार्ड के लिए पात्र माने की बात का उल्लेख भी कर दिया।
पात्रता के लिए गाइडलाइन
0 उम्मीदवार का एडमिशन प्रवेश परीक्षा या साक्षात्कार हो।
0 नेशनल रिजर्वेशन पॉलिसी का पालन किया गया हो।
0 कोर्स वर्क� से लेकर आरडीसी (रिसर्च एडवाइजरी कमेटी) द्वारा निरीक्षण किया गया।
0 थीसिस की साफ्ट कॉपी विवि में जमा की गई हो।
0 थीसिस जमा करने से पहले कम से कम एक रिसर्च पेपर का पब्लिकेशन अनिवार्य।
विवि ने जो प्रमाणपत्र बांटे हैं, उसमें साफतौर पर बड़ी खामी नजर आ रही है। सभी उम्मीदवारों को एक तराजू में तौला गया है। इसमें जल्द ही सुधार होना चाहिए। इन प्रमाण पत्रों के गलत उपयोग की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

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