ताप्ती नदी में बापू की अंतिम अस्थियां विसर्जित की गई थीं

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tapti river

इंदौर। देश की कई नदियों की तरह ताप्ती नदी में भी बापू की अंतिम अस्थियां विसर्जित की गई थीं। सतियारा घाट पर एक ओटला बनाकर इसे बापू का अस्थि विसर्जन स्थल नाम दिया है।
बापू 1933 में हरिजन आंदाेलन के तहत राशि एकत्र करने बुरहानपुर आए थे। इसके बाद आईं तो सिर्फ उनकी अस्थियां। यही स्मृतियां शहर के बुजुर्ग और गांधीवादी चिंतकों के मन में आज भी सजीव हैं।
वरिष्ठ गांधीवादी नंदकिशोर देवड़ा बताते हैं जब बापू पहली बार बुरहानपुर आए तब मैं छह साल का था। वर्तमान सुभाष स्कूल के स्थान पर राबर्ट्स हाई स्कूल मैदान पर उनके दर्शन के लिए पहुंचे। हरिजन अांदोलन के तहत वे यहां राशि जुटाने आए थे। राजपुंरा में चलने वाली चरखा कक्षा में बापू ठहरे। इसके बाद फरवरी 1948 में उनकी अस्थियां ही बुरहानपुर पहुंच सकीं। गांधी भवन में हजारों की भीड़ ने उनके अंतिम दर्शन किए। रामधुन के साथ अस्थि कलश सतियारा घाट ले जाया गया। यहां उन्हें अंतिम विदाई देकर अस्थियां ताप्ती नदी में विसर्जित की गईं। बापू की स्मृतियां आज भी उसी शिद्दत से जिंदा हैं।

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