इंदौर में बनेगी सेंट्रल ड्रग लैब

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इंदौर। जल्दी ही सेंट्रल ड्रग लैब स्थापित होगी। इसके लिए इंदौर में जमीन का चयन हो चुका है। देश की 9वीं और प्रदेश की पहली इस लैब में दवाओं की गुणवत्ता परखी जाएगी। इनके दुष्प्रभावों की जानकारी भी तुरंत मिल सकेगी। एंटी बॉयोटिक दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी सरकार जल्दी ही नीति की घोषणा करेगी।
यह बात डिप्टी ड्रग कंट्रोलर डॉ. के. बंगारू राजन ने कही। वे इंडियन फार्मासिटिकल एसोसिएशन की एमपी ब्रांच और फार्मा टेक्नालॉजी इंडेक्स द्वारा आयोजित आईपीए कॉन्क्लेव और फार्माटेक एक्सपो के शुभारंभ पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सेंट्रल लैब के लिए जीपीओ के पास जमीन चुन ली गई है। नामांतरण की प्रक्रिया भी हो गई है। जल्दी ही यहां लैब का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद दवाओं की गुणवत्ता जांचना और आसान हो जाएगा। ड्रग ट्रायल को लेकर डॉ. राजन ने बताया कि नियमों में कठोरता तो आई है। नए नियमों के तहत देशभर में एक हजार से ज्यादा इथिकल समितियां रजिस्टर्ड हो चुकी हैं। इनमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र और गुजरात में हैं। इंडियन फार्मास्टिकल एसोसिएशन स्टेट ब्रांच के अध्यक्ष डॉ. एसबी रिझवानी ने कहा कि इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में फार्मा कंपनियों के लिए लगातार मौके बढ़ रहे हैं।
डॉ. राजन ने कहा कि मेक इन इंडिया अभियान के बाद फार्मा उद्योग में लगने वाली मशीनों की कीमत कम हुई है। विदेशी मशीन डेढ़ करोड़ है तो भारत में बनी मशीन 40 लाख रुपए में मिल जाती है। इसके बावजूद दवाओं की कीमत कम नहीं हो रही। इसकी वजह दवा उद्योग में लगने वाले कच्चे मटेरियल की कीमत लगातार बढ़ रही है। दवाओं की कीमत कम करने के लिए सरकार को कदम उठाने होंगे।

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