छायी शेरो और ग़ज़लों की लहर…!

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sher gazal
इंदौर. शोला हूं भड़कने की गुजारिश नहीं करता….सच मुंह से निकल जाता है कोशिश नहीं करता…., इस तरह के कई बेहतरीन शेर और गजलें गजल प्रेमियों को सुनने को मिलीं शनिवार की शाम आनंदमोहन माथुर सभागार में। यहां संस्था सबसंग और अदबी कुनबा की ओर से कार्यक्रम सजदा आयोजित किया गया। इसमें गायक विनीत शुक्ला ने जगजीत सिंह की गाई गजलें, फिल्मी गीत और पंजाबी फोक गीत पेश किए।
गजलों की इस महफिल की शुरुआत जगजीत सिंह के गाए लोकप्रिय गीत चि_ी न कोई संदेश … से की गई। इसके बाद विनीत शुक्ला ने जगजीत सिंह की कई चुनिंदा गजलें पेश कीं। इनमें गुलजार की शाम से आंखों में नमी सी है… से लेकर मिर्जा गालिब की हजारों ख्वाहिशें एेसी के हर ख्वाहिश पे दम निकले…तक कई गजलें, नज्में और गीत सुनाए।
विनीत शुक्ला ने जगजीत सिंह की कई एेसी गजलें सुनाईं जिन्हें सुनकर सुनने वाले झूम उठे। इनमें हुजूर आपका भी एहतराम करता चलूं, इधर से गुजरा था सलाम करता चलूं…., माना कि मुश्ते खाक से बढ़ कर नहीं हूं मैं, लेकिन हवा के रहमो करम पर नहीं हूं मैं…., और बाजीचा एे अत्फाल है दुनिया मेरे आगे… जैसी गजलों को खूब दाद मिली। कार्यक्रम में शुक्ला ने जगजीत सिंह के गाए फिल्मी गीतों की मेडले पेश की, जिसमें होठों से छू लो तुम…, तुम जो इतना मुस्कुरा रहे हो…, तुमको देखा तो ये खयाल आया…सहित कुछ और गीत शामिल थे। विनीत ने जगजीत सिंह के कुछ प्रिय पंजाबी लोक गीत भी गाए जिनमें मिट्टी दा पावा नइयों बोलदा… भी शामिल था। जगजीत सिंह ने कुछ गजलों को शास्त्रीय अंदाज में पेश किया था और कुछ टप्पे भी गाए थे जो कि काफी लोकप्रिय रहे हैं। एेसी रचनाएं भी इस महफिल में शामिल की गईं। संगीत संयोजन नीतेश शेट्टी का था।

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