इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल का रविवार को अंतिम दिन

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NDImanoj muntsheer ...photo Ashu patel
इंदौर। तीन दिनी ‘इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल” के अंतिम दिन रविवार को हिंदी के अलावा मराठी, मालवी, सिंधी और गुजराती भाषा के विद्वानों ने भी उपस्थिति दर्ज कराई। मगर मुख्य आकर्षण रहे ‘बाहुबली” और ‘कौन बनेगा करोड़पति” के लेखक मनोज मुंतशिर और किन्नर लेखिका लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी।बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में दोनों का जबरदस्त क्रेज देखा गया। इस दौरान लक्ष्मी की किताब ‘मैं लक्ष्मी मैं हिजड़ा” का लोकार्पण भी किया गया। बेस्ट सेलर में शुमार उपन्यास ‘नॉन रेसिडेंट बिहारी” के लेखक शशिकांत मिश्र आयोजकों से नाराजगी के चलते अपनी बात कहे बिना ही चले गए।
फिल्मी गीतकार और स्क्रिप्टराइर मनोज मुंतशिर ने उस दौर का जिक्र किया जो उन्हें फुटपाथ पर भिखारियों के साथ गुजारना पड़ा। इस बीच केबीसी के समीर नायर की नजर में उनकी लिखी चंद लाइनें आईं और जिंदगी बदल गई। अमिताभ बच्चन से मेरी मुलाकात कराई।
उन्हें लाइनें पसंद आईं और करियर की गाड़ी पटरी पर आ गई। मेरा मानना है कि अपनी भाषा की जड़ों से जुड़े बिना हम किसी दूसरी भाषा की भी सेवा नहीं कर सकते हैं। ‘आधा मैं हूं मुझमें बाकी आधा है तू, दिल में धड़कन कम है यारा ज्यादा है तू” और ‘प्यार है ऐसा खेल यारा तनहा कोई जीता नहीं, तू जहां थक के बैठ जाएगा हार जाऊंगा मैं भी वहीं” जैसी मनोज की सुनाई पंक्तियां खूब पसंद की गईं। उन्होंने कहा कि ‘मुंतशिर” के मायने टूटा-टूटा, बिखरा-बिखरा होता है। मैं भी बिखरा हूं मगर कांच की तरह नहीं रोशनी की तरह। नए रचनाकारों को मुंतशिर ने सलाह दी कि पहले दूसरों का खूब पढ़ो फिर अपना नया गढ़ो।
थर्ड जेंडर को नई पहचान देने वाली लक्ष्मी ने कहा कि मैं जिंदगी का हर पल एंजॉय करती हूं। इस पल मैं यहां हूं, यही मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ है। अतीत के झरोखे में झांकने या भविष्य की चिंता करने के बजाय मैं आज को एंजॉय करती हूं। यकीन जानिए, आज मैं जो कुछ भी हूं माता-पिता की बदौलत हूं। भगवान हर जगह नहीं आ सकता मगर इसलिए उसने मां को बनाया। मां मुझ जैसे थर्ड जेंडर को कलेजे से लगाकर नहीं रखतीं तो मैं भी किन्नारों की भीड़ में कहीं गुम हो गई होती।’मैं लक्ष्मी मैं हिजड़ा” किताब में मैंने वो तमाम बातें लिखी हैं जिन्हें मैं खुले मंच पर शेयर नहीं कर सकती। यूएन में एशिया पैसेफिक को रिप्रजेंट करने वाली लक्ष्मी ने बताया कि उन्हें तवायफों पर बनीं उमराव जान, पाकीजा जैसी फिल्में बेहद पसंद हैं। बाकायदा भरतनाट्यम की ट्रेनिंग ली है और एजुकेशन मेरा पैशन है। इसलिए मैंने डांस स्कूल शुरू किया है।

    'No new videos.'

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