विश्व चैम्पियन विश्वनाथन आनंद इंदौर आये

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VISWANATH

इंदौर.पहले के समय और आज के समय में शतरंज के खेल में बदलाव आ गया है। जब मैंने शतरंज के खेल को चुना था, तब न तो इतनी सुविधाएं थी और न ही यह खेल इतना लोकप्रिय था। लेकिन आज इस खेल का पूरी तरह से स्वरूप बदल गया है। पांच बार के विश्व चैम्पियन व ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद ने यह बात एमरल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल में कही।
आनंद ने कहा कि आज शतरंज खिलाड़ी कम्प्यूटर के सामने बैठकर न केवल खेल सकता है, बल्कि रणनीति भी बना सकता है। कम्प्यूटर के आने के बाद इस खेल में क्रांति आ गई है। मैं लगभग 25 सालों से इस खेल से जुड़ा हूं और कई खेले हैं, लेकिन हर खिलाड़ी के साथ खेलने का अनुभव अलग ही मिला है। कास्पारोव के साथ मैंने सबसे ज्यादा मुकाबले खेले और अब युवा खिलाड़ी पीटर कार्लसन के खिलाफ लगातार खेल रहा हूं। हर बार एक नया अनुभव सामने आता है।
पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले विश्वनाथन आनंद ने खेल कॅरियर में सर्वप्रथम टेनिस को चुना था। जिस दिन टेनिस खेलना शुरू किया था, तो काफी रनिंग करना पड़ी थी और रैकेट थामकर हाथ भी दुखने लगा था और अगले दिन से मैंने टेनिस छोड़ शतरंज खेलने का फैसला ले लिया। आनंद ने कहा कि आजकल अनेक खिलाडिय़ों के ऊपर फिल्में बन रही है, यह काफी अच्छी बात है। अगर मेरे व शतरंज के ऊपर भी कोई फिल्म बनती है तो मुझे खुशी होगी।
समारोह के दौरान ही विश्वनाथन आनंद ने एमरल्ड स्कूल की शतरंज, टेबल, टेनिस, बास्केटबॉल टीम के प्रत्येक सदस्य को राष्ट्रीय स्तर पर सफल होने पर विशेष रूप से सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने अन्य खेलों के खिलाडिय़ों को सम्मान से नवाजा। उन्होंने एमरल्ड के एक साथ 20 विद्यार्थियों के साथ शतरंज का मुकाबला खेला और वह इन नन्हों की शातिर चालों से प्रभावित भी हुए। एमरल्ड स्कूल के संचालक मुक्तेश सिंह व प्राचार्य सिद्धार्थ सिंह भी मौजूद थे।

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