फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए करें एक्रो योगा

yoga

इंदौर. योगा के कई रूपों में सामने आता है। कुछ रूप पुराने हैं और कुछ नए। इन्हीं नए रूप में एक नया नाम है एक्रो योगा। योगा का ये फॉर्म सेन फ्रांसिस्को से आया है। ये योगा और एक्रोबेटिक से मिलकर बना है। इस योगा की खास बात ये है कि इसे अकेले नहीं किया जाता, ये हमेशा पार्टनर के साथ ही किया जाता है। अगर ये पार्टनर दोस्त हैं या पति-पत्नी हैं तो ये योगा रिलेशनशिप को भी मजबूती देता है और टीमवर्क को मजबूत करता है।
एक्रो योगा के तीन हिस्से होते हैं। जो पार्टनर जमीन पर होता है वो बेस कहलाता है, जो पार्टनर उसके सहारे से हवा में होता है वो फ्लायर कहलाता है। फ्लायर डायनमिक पोजीशन को मूव करता है और ग्राउंड से उसका संपर्क बेस के जरिए ही होता है। एक्रो योगा के लिए वैसे ये दो ही काफी हैं पर शुरुआत में यानी प्राइमरी ट्रेनिंग के समय तीसरा स्पोटर होता है जो ये देखता है कि योगा सही तरीके से किया जा रहा है या नहीं। स्पोटर को इंस्ट्रक्टर कह सकते हैं पर जब बेस और फ्लायर परफैक्शन पा लेते हैं तो उसके बिना भी एक्रो योगा कर सकते हैं।
योगा इंस्ट्रक्टर दीप्ति सोमानी ने बताया कि एक्रो योगा बॉडी को स्ट्रेंग्थन करता है खास तौर से कोर मसल्स यानी कमर से हिप्स तक के मसल्स को मजबूत करता है। इसे करीब 40 मिनट रोज किया जाए तो इससे ब्लड सरक्यूलेशन तेज होता है। डाइजेस्टिव सिस्टम सुधरता है, बॉडी का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और बॉडी के टॉक्सिन भी दूर होते हैं। जहां तक मेंटल हेल्थ की बात है तो इससे एंजाइटी, डिपे्रशन की हालत में बेहद फायदा होता है। मेमोरी भी शार्प होती है और कुल मिलाकर क्वालिटी ऑफ लाइफ इम्प्रूव होती है।

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