राजवाड़ा का रुप और कल्पनाओं के रंग से कला का हुनर

rajwada art

इंदौर। किसी ने राजबाड़ा के मेन गेट को हाईलाइट किया तो किसी ने गेट के ऊपर के झरोखे चित्रित किए। किसी ने राजबाड़ा के सामने पाम के पेड़ों को हाईलाइट किया तो किसी ने अहिल्या देवी की मूर्ति को। किसी ने एब्सटै्रक्ट में राजबाड़ा की छवि दिखाई तो किसी ने बारीकी से इमारत के कंगूरों में रंग भरा। यह नजारा था रविवार की दोपहर राजबाड़ा उद्यान में आर्ट एन हार्ट के आर्ट कैंप का।
कैंप का उद्घाटन वरिष्ठ चित्रकार रमेश खेर ने किया। उनके स्ट्रोक्स से युवा कलाकारों ने प्रेरणा ली और फिर शुरू हो गया स्केचिंग और पेंटिंग का सिलसिला। आर्ट एन हार्ट के अध्यक्ष प्रदीप कनिक ने अपनी स्टाइल में अपने प्रतीकों के साथ राजबाड़ा की छवि रची। निवेदिता शुक्ला ने कहा कि यहां आकर स्टूडेंट लाइफ की यादें ताजा हो गईं। उनकी 11 साल की बेटी ने भी राजबाड़ा के झरोखों की पेंटिंग बनाई। कैलाश चंद्र शर्मा सेल्फ टॉट आर्टिस्ट हैं।
उन्होंने कहा कि जब मैं बच्चा था तब राजबाड़ा का लोकार्पण समारोह देखा था। छोटा बच्चा जब गर्दन ऊंची कर किसी बड़ी इमारत को देखता है, उसका जैसा व्यू होता है, वैसा ही नजारा उन्होंने ड्राइंग शीट पर उतारा है।
स्कल्पटर अजय पुन्यासी ने राजबाड़ा का क्ले म्यूरल बनाया। उन्होंने कहा कि वे इसके जरिये हेरिटेज को बचाने का संदेश देना चाहते हैं। टैक्सटाइल डिजाइनर सीमा खरे ने एब्सट्रैक्ट शैली में नाइफ पेंटिंग के माध्यम से राजबाड़ा बनाया। फाइन आर्ट स्टूडेंट कौशल साहू ने केवल कलर्स के स्ट्रोक्स से राजबाड़ा का प्रभाव पैदा किया। माधुरी गोले ने इमारत की छोटी-छोटी डिटेल्स पर ध्यान केन्द्रित किया। आकाश भाटी ने लाइव स्केचिंग करते हुए राजबाड़ा के आसपास के माहौल को पकड़ा।
राजबाड़ा के सामने बैठकर पेंटिंग बना रहे चंद्रशेखर शर्मा ने 50 बरस पहले यानि 1965 में फाइन आर्ट कॉलेज से डिप्लोमा लिया था। उनसे दो बैच जूनियर वीजी भावे आर्मी के रिटायर कैप्टन हैं। दोनों ने ड्राई ऑइल पेस्टल्स से राजबाड़ा को रंगों में उतारा। पुरानी बातें याद करते हुए कैप्टन भावे ने कहा कि जब सेना में चला गया तो पेंटिंग नहीं कर पाता था। तब चिंचालकर गुरुजी ने गुरुमंत्र दिया कि हमेशा एक नोटबुक और पेन साथ रखो। जब मौका मिले स्केच बना लो।

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