MP में हाईअलर्ट, सिंहस्थ में बढ़ेगी सुरक्षा

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शनिवार सुबह पठानकोट में हुए आतंकी हमले के बाद मध्यप्रदेश भी हाईअलर्ट पर है। प्रदेश में सबसे बड़ी चुनौती है सिंहस्थ-2016 की सुरक्षा। यदि यहां सुरक्षा व्यवस्था में जरा भी चूक हुई तो आतंकवादी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। हालांकि प्रदेश पुलिस और खूफियां एजेंसी भी अपने स्तर पर बारिकी से नजर बनाए हुए हैं। मध्यप्रदेश की विशेष टास्क फोर्स भी तैनात है।

सिंहस्थ में सुरक्षा व्यवस्था 25 हजार जवान करेंगे। खास सुरक्षा ‘कैडर’ बनाया गया है। सभी की तैनाती मार्च से होगी, जो पूरे उज्जैन में तैनात रहेंगे। सिंहस्थ 2016 में पचास प्रतिशत सुरक्षाकर्मी वे ही होंगे, जिन्होने पिछले कुंभ में ड्यूटी दी थी। सभी जिलों से तीन-तीन सौ के बैच में जवान उज्जैन भेजे जा रहे हैं, जिन्हें वहां की भौगोलिक स्थित से रूबरू कराया जा रहा है।
सिंहस्थ-2016 में 125 प्वाइंट बनाए गए हैं, जिनमें करीब 500 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। हाई रिसोल्यूशन वाले यह कैमरे रात-दिन गतिविधियों पर नजर रखेंगे।सिंहस्थ के दौरान यहां पांच करोड़ तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है। इसके लिए पुलिस भी अत्याधुनिक उपकरणों से लैस रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था पर 47 करोड़ रुपए खर्च होंगे। आतंकी चाहकर भी घुसपैठ नहीं कर पाएंगे। देश की गुप्तचर एजेंसियों ने अभी से डेरा डाल दिया है। सिमी के स्लीपर सेल उनके राडार में है। शहर के चारों तरफ नाके बनाए जा रहे हैं, जो आधुनिक उपकरणों से लैस रहेंगे।

हॉक फोर्स से प्रशिक्षित और बुलेट प्रूफ जैकेट से लैस पुलिस कर्मचारियों की टीम बनाई जा रही है, जो किसी भी घटना की सूचना मिलते ही पांच मिनट में पहुंच जाएगी। लेब्राडोर नस्ल के 60 कुत्ते और 85 घोड़ों से हर समय पेट्रोलिंग होगी। तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए 54 किमी. में बैरिकेडिंग लगाई जा रही है।मानव रहित जहाज (ड्रोन) से नजर रखी जाएगी। रिकॉर्डिंग के साथ-साथ सुरक्षा के इंतजाम भी होंगे। 14 हेड काउंटर कैमरे लगाए जाएंगे। चेहरे और सिर की गिनती कर मेले में लोगों की संख्या पता लग जाएगी।सिंहस्थ की सुरक्षा पुलिस के लिए चुनौती भरा रहा है। देश के कोने-कोने से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और साधुओं की सुरक्षा और सुगम यातायात में पुलिस को हमेशा कामयाबी मिली है।

उज्जैन में आयोजित हो रहे 21वीं शताब्दी के इस सिंहस्थ की सुरक्षा के लिए MP पुलिस ने भी बड़े पैमाने पर तैयारी की है।उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि सिंहस्थ की ड्यूटी करने वाले पुलिसर्मी इसे सरकारी काम न मानकर एक मिशन के रूप में लें।

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