इस IITian के नॉलेज ने बदल दिया टीचिंग का ट्रेंड

girish
बच्चों को किताबी नॉलेज के साथ-साथ प्रेक्टिकल नॉलेज की जरूरत होती है। सीमित संसाधनों के कारण सरकारी स्कूलों के बच्चे प्रेक्टिकल नॉलेज में पीछे हो जाते हैं। शिक्षा व्यवस्था में खामियों को बारिकी से समझा है गिरीश महाले ने।फिल्म थ्री इडियट के रैंचो की ही तरह बच्चों को समर्पित गिरीश ने शिक्षा का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसमें नॉलेज, स्किल्स और वैल्यू शामिल हैं।छिंदवाडा जिले के पांढुर्ना के शासकीय स्कूल में पढ़ने वाले इस शख्स ने विदिशा के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से बीई किया। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर से बाकी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद तीन साल IBM में नौकरी भी की।
वे किताबी ज्ञान को न सिर्फ मॉडल के जरिए समझा रहे हैं, बल्कि उस मॉडल को स्थानीय चीजों की मदद से भी तैयार कर रहे हैं। यही कारण है कि एक छात्र ने साइकिल से चलने वाली वॉशिंग मशीन बना डाली। इसके अलावा भी रोज कोई न कोई छात्र नए-नए प्रयोग कर रहा है।गिरीश के इस मॉडल का नाम है ”प्रत्यय एडु रिसर्च लैब”। उनके इस पायलट प्रोजेक्ट का लाभ करीब 1000 से ज्यादा छात्र उठा रहे हैं।
गिरीश के मुताबिक ‘मैं ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहा हूं जहां पर न सिर्फ बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन मिले, बल्कि लड़के और लड़कियां समान रूप से उस शिक्षा को हासिल भी कर सकें।’गिरीश का यह मॉडल पांढुर्ना और उसके आसपास के गांवों में चल रहा है। इसके तहत सात स्कूल और चार हॉस्टल हैं, जहां बच्चों के साथ विज्ञान, कम्प्यूटर साइंस, राजनीति शास्त्र जैसे विषयों के मॉडल पर काम किया जा रहा है। गौरतलब यह भी है कि इन मॉडल में स्थानीय युवा बढ़चढ़कर भाग ले रहे हैं।
गिरीश की टीम समय-समय पर बच्चों के कोर्सेस में मौजूद प्रेक्टिकल को करके बताती है और फिर उन्हें खुद मॉडल बनाने के लिए प्रेरित करती है। इसके लिए वीडियो प्रोजेक्टर की भी मदद ली जाती है। इसी का ही परिणाम है कि एक बच्चे ने ऐसी वाशिंग मशीन बना दी जो साइकिल से चलती है। अन्य बच्चों को भी इसी प्रकार के इनोवेशन करने के लिए प्रेरित किया जाता है। करीब एक दर्जन लोगों की यह टीम इन गरीब बच्चों के लिए काम करती है। यही प्रोजेक्ट अब उत्तरप्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में भी शुरू करने की योजना है।

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