भारतीय थलसेना का 68वां दिवस

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67 साल पहले 15 जनवरी को ले. जनरल के एम करियप्पा के हाथों ब्रिटिश जनरल फ्रांसिस बुचर द्वारा आर्मी की बागडोर सौंपे जाने के साथ ही इस दिन से भारतीय थल सेना दिवस मनाया जाने लगा। इस दौरान भारतीय सेना तमाम मुश्किलों से जूझी, बड़े से बड़े संकट के समय, और दुश्मन से जंग में देश की सुरक्षा की। सीमित संसाधनों और अंतरर्राष्ट्रीय दवाब की परवाह किए बिना सरहद के इतर अमन-चैन छीनने आए भेडिय़ों को धूल चटाई और हजारों जवान मातृभूमि की बलवेदी पर कु र्बान हो गए।
यह भी एक पुराना सच है कि हमारे तमाम शांति प्रयासों के बावजूद भारत और पाकिस्तान की सीमा पर संघर्ष का दौर जारी रहा है। हालांकि, फायरिंग में पहले से कुछ कमी आई है, लेकिन माहौल पूरी तरह से शांत नहीं है। बीएसएफ के जवान मुस्तैदी से सीमा पर डटे हुए हैं, वहीं सेना भी स्थिति का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। भारतीय सेना दुनिया में अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी सेना है, जबकि पाकिस्तान को आठवां नंबर हासिल है।
भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल समेत चार जंग लड़ी जा चुकी हैं। पाक ने हर बार धोखे से वार किया लेकिन मुंह की खाई।
सक्रिय सैनिक संख्या और रिजर्व सेना के लिहाज से इंडियन आर्मी दुनिया में दूसरे नंबर पर है। वहीं एक्टिव आर्मी के मामले में वर्ल्ड रैंकिंग -3 है। हिंदुस्तान के पास 13,25,000 एक्टिव और 12,00,000 रिजर्व जवान हैं। सेना ने 1947, 65, 71 और 1999 में पाकिस्तान से लड़ाई लड़ी और फतह हासिल की। बस 1962 में चीन के खिलाफ हार झेलनी पड़ी। न केवल सरहद बल्कि प्राकृतिक आपदा और अन्य घरेलू विपत्ति के दौर में भी सेना ही काम आई। भारतीय सेना की 30 रेजीमेंट और 63 बख्तरबंद रेजीमेंट 37 डिविजनों में 7 अलग-अलग ऑपरेशनल कमांड के तहत तैनात हैं। सेना के पास 3000 से ज्यादा युद्धक टैंक हैं।

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