चित्र के ज़रिये व्यक्त किये स्मार्ट सिटी पर विचार

art camp
प्रीतमलाल दुआ सभागार में रविवार को आर्ट कैंप आयोजित हुआ। इसमें 20 से अधिक चित्रकारों ने स्मार्ट सिटी की अपनी कल्पना को रंगों से बताया। अमिता पांचाल ने ढाई बाय दो साइज के कैनवास पर एक्रेलिक कलर से राजबाड़ा का चित्र बनाते हुए इसके आसपास भरपूर हरियाली को दर्शाया। चित्र में उन्होंने सीएनजी के प्रयोग और जल वितरण व्यवस्था की खामियां दूर करने की ओर ध्यान आकृष्ट किया। मंशा प्रदीप ने ऐतिहासिक धरोहरों के उचित रखरखाव के साथ वहां गाइड की जरूरत को समझाया।
वरिष्ठ चित्रकार कैलाशचंद्र शर्मा ने ज्ञान के प्रतीक पीले कलर के बैकग्राउंड पर आकाश कुसुम खिलाकर दर्शाया कि स्मार्ट सिटी की तैयारी समग्र जानकारी के साथ ही की जाए। ऐसा न हो कि हमारी बातें आकाश कुसुम की तरह सब्जबाग बनकर रह जाएं। वरिष्ठ चित्रकार प्रदीप कनिक ने क्वार्टर शीट पर पेस्ट्रल कलर की आकृति से दर्शाया कि शहर की बढ़ती आबादी के कारण लोक परिवहन की महत्ता दर्शाई। इसके अलावा प्रदूषण से बचने के लिए साइकल और बैटरी रिक्शा के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण के लिए कार पुलिंग के साथ-साथ टू ह्वीलर पुलिंग को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
किसी भी स्मार्ट सिटी की पहली शर्त है ‘स्मार्ट सिटीजन’। अगर लोग ही समझदार नहीं होंगे तो उन्हें कितनी भी बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएं वे उनका सदुपयोग नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा इंदौर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करते वक्त हमें ध्यान रखना होगा कि इस कंसेप्ट से शहर महज कांक्रीट के जंगल में तब्दील न हो जाए। शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को पूरा संरक्षण मिले और हरियाली को विशेष महत्व दिया जाए। जल, थल और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की समुचित व्यवस्था हो। ‘आर्ट कैंप’ में स्मार्ट सिटी पर ये विचार शहर के चित्रकारों ने अपने चित्रों के जरिए व्यक्त किए।

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