MOVIE REVIEW : ‘साला खड़ूस’

SAALA KHADUS

फिल्म की 109 मिनट की कहानी हिसार से शुरू होती है, जहां बॉक्सिंग कैंप होता है। बस, वहीं से आदि तोमर (आर. माधवन) पर शारीरिक शोषण का केस लाद दिया जाता है और उसे नौकरी से निकालने की बजाय बॉक्सिंग के मामले में काला पानी माने जाने वाले शहर चेन्नई में ट्रांसफर कर दिया जाता है। वाकई में यह सारा खेल बॉक्सिंग डिपार्टमेंट के सबसे बड़े अधिकारी जाकिर हुसैन की रणनीति के अनुसार होता है, जिन्हें चाटुकारिता के अलावा टैलेंट की समझ भी नहीं होती है। खैर, आदि चेन्नई जैसी दयनीय स्थिति में जी रहे लोगों के बीच से एक टैलेंट को पहचान जाता है। अब वह पांड्यन (नासिर) की देखरेख में मधी (रितिका सिंह) को ट्रेंड करता है और साथ ही उसकी बहन लक्स (मुमताज सोरकर) को भी सिखाता है, लेकिन मधी की तुलना में लक्स पीछे रह जाती है। बस, वहीं से दोनों बहनों के बीच एक दीवार सी आ जाती है। खैर, इसी के साथ फिल्म में गजब का ट्विस्ट आता है और कहानी तरह-तरह के मोड़ लेते हुए आगे बढ़ती है।
आर माधवन ने अपने अभिनय में हर तरह से फिट दिखने का पूरा प्रयास किया है, जिसमें में सफल भी रहे। माधवन वाकई में कुछ अलग करने की चाहत लिए उसकी तह तक जाते से दिखाई दिए। साथ ही रितिका सिंह ने भी अपनी पहली ही पारी में ऑडियंस के सामने खुद को साबित कर दिखाया है कि अगर अभिनय दिल से किया जाए तो भला उसमें निखार क्यों नहीं लाया जा सकता। यानी वे माधवन की उम्मीदों पर खरी उतरती नजर आईं। मुमताज सोरकर भी अपना मुकाम पाने के लिए एक बहन के किरदार में फिट रहीं। इसके अलावा जाकिर हुसैन और नासिर ने भी अपने-अपने रोल को बखूबी अदा किया है।

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