इंदौर को अब चाहिए स्मार्ट मास्टर प्लान

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इंदौर। स्मार्ट रनवे पर उड़ान भरने को तैयार इंदौर ने शहरवासियों को स्मार्ट लिविंग लाइफ स्टाइल के सपने दिखा दिए हैं। विरासत को सहेजने के साथ स्मार्ट वल्र्ड क्लास सुविधाओं से लैस होने को आतुर इंदौर के लिए स्मार्ट मास्टर प्लान की दरकार है।
केंद्र सरकार ने इंदौर का चयन स्मार्ट सिटी में कर मास्टर प्लान के लिए नई बहस खड़ी कर दी है। इंदौर विकास योजना 2021 के मिड टर्म रिव्यू में स्मार्ट सिटी क्षेत्र, मेट्रो, शहर के चारों ओर अपशिष्ट के लिए डिस्पोजल, रेलवे स्टेशन और आईडीए के प्रस्तावित प्रोजेक्ट आदि को जोडऩा है। शहर का मास्टर प्लान 8 साल पहले 2021 की सोच के साथ बनाया था, लेकिन समय के साथ बदली सोच और विकास का इसमें समावेश नहीं होने से अब बदलाव की दरकार है।
वर्तमान शहर स्मार्ट के साथ मेट्रो सिटी भी बन रहा है। इस दृष्टि से मास्टर प्लान में आर्थिक स्रोत जुटाने के उपायों की कमी है। इसके लिए शहर विकास से जुड़े सभी विभागों की जिम्मेदारी तय होना चाहिए। जोनल प्लान, सिटी विकास योजना, मोबेलिटी प्लान, सेनिटेशन और कम्युनिकेशन प्लानिंग भी शामिल हो। यह प्लान 20 साल के लिए बनाया जाता है। इन प्लान में शहरीकरण के बदलते मापदंडों को आसानी से लें। समय-समय पर रिव्यू कर बदलाव को शामिल किया जा सकता है।
मास्टर प्लान-2021 में पुनरीक्षण ही नहीं बड़े बदलाव की जरूरत है। मास्टर प्लान क्रियान्वयन के लिए कोई एक एजेंसी का निर्धारण हो, जिससे वर्तमान व्यवस्था के अंग नगर निगम, विकास एजेंसी इंदौर विकास प्राधिकरण और नगर व ग्राम निवेश विभाग के बीच समन्वय हो सके और प्रक्रिया में आ रही बाधाएं दूर हों। क्रियान्वयन एजेंसी नहीं होने से अभी कई प्रोजेक्ट तेजी से शुरू तो होते हैं, लेकिन बाद में काम की रफ्तार धीमी हो जाती है। इससे पैसे की बर्बादी भी होती है।

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